लू से राहत दिलाता है काला-कलूटा फालसा

छोटा सा फल फालसा लू से ही नहीं बल्कि चेहरे को धूप से बचाता है और ह्दय, मधुमेह जैसे खतरनाक रोगों से शरीर की रक्षा करता है। चिलचिलाती गर्मी से परेशान हैं और शीतल शर्बत की जरूरत महसूस कर रहे हैं तो फालसा का रस क्यों नहीं लेते। यह आपको गर्मी से तो राहत दिलाएगा ही, शरीर के लिए काफी पौष्टिक भी है। गर्मियों के सबसे लोकप्रिय फलों की सूची में फालसा प्रमुखता से शामिल है। अपने लाजवाब स्वाद के कारण फालसा हर किसी का पसंदीदा फल है। छोटे-छोटे गोल-मटोल, गहरे बैंगनी रंग के नरम और रसीले फालसे का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। पके हुए फालसे को नमक, काली मिर्च और चाट मसाला मिलाकर खाया ही नहीं जाता, बल्कि इसका शर्बत भी काफी लोकप्रिय है। छोटे-से फल फालसा को पोषक तत्वों की खान और एंटीऑक्सीडेंट कहना गलत न होगा। देखा जाए तो फालसा फल का 69 प्रतिशत भाग ही खाने लायक होता है, बाकी हिस्से में गुठली होती है। जानकारी के अनुसार इसमें मौजूद मैग्नीशियम, पोटैशियम, सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व इसे हमारे लिए सेहत का खजाना बना देते हैं। फालसा में गर्मी के मौसम से संबंधित समस्याओं को दूर करने की अदभूत क्षमता होती है। फालसे के रस को शांत, ताजा और आसानी से पचने और गर्मी में प्यास से राहत पहुंचाने वाला आदर्श शीतल टॉनिक भी कहा जाता है। इसका उपयोग शारीरिक विकारों और बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। यह पित्ताशय और जिगर की समस्याओं को दूर करता है। फालसा में थोड़ा कसैलापन भी है जो शरीर से अतिरिक्त अम्लता कम करके पाचन संबंधी विकार को दूर करता है। यह अपच की समस्या से भी मुक्ति दिलाता है और भूख भी बढ़ाता है। विटामिन सी और खनिज तत्वों से भरपूर फालसा के सेवन से रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के रोगियों को फालसा खाने से सांस की तकलीफ में राहत मिलती है। हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोधों से यह बात स्पष्ट हो गई है कि फालसा में रेडियोधर्मिता भी होती है। इस कारण यह कैंसर से लडऩे में भी शरीर की सहायता करता है। इससे मस्तिष्क की गर्मी और खुश्की भी दूर होती है। खनिज लवणों की प्रचुरता होने के कारण इसे खाने से शरीर में होमोग्लोबिन बढ़ता है और एनीमिया से बचाव होता है। इसके सेवन से मूत्र संबंधी समस्याओं से भी राहत मिलती है। फालसे का रस गर्मियों में चलने वाली लू और उससे होने वाले बुखार से बचाने में खास भूमिका निभाता है। अगर आपका स्वभाव चिड़चिड़ा है तो फालसा को किसी भी रूप में खाएं, लाभ होगा। यह उल्टी और घबराहट दूर करता है। धूप में रहने के कारण शरीर के खुले अंगों पर होने वाली लालिमा, जलन, सूजन और कालेपन को दूर करने में भी यह मददगार है। विटामिन सी से भरपूर फालसे का खट्टा-मीठा रस खांसी-जुकाम को रोकने और गले में होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने में प्रभावशाली होता है। फालसा पेड़ की पत्तियां और तने भी औषधीय गुण लिए होते हैं। त्वचा के कटने, छिलने, जलने, दर्दनाक चकत्ते पडऩे, फोड़े होने, एग्जिमा, त्वचा संबंधी रोगों में फालसा की पत्तियों को रात भर भिगोने के बाद घिस कर लगाने से लाभ होता है। यह एंटीबायोटिक की तरह काम करती हैं। तने की छाल का अर्क बुखार को कम करने और दस्त के इलाज में प्रभावकारी है। जड़ की छाल का प्रयोग गठिया के इलाज के लिए किया जाता है। इसके बीज से तेल निकलता है जिसे प्रजनन संबंधी समस्याओं के निवारण में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि फालसा चाहे कच्चा खाया जाए या इसका शर्बत पिया जाए, सीमित मात्रा में खाना ही बेहतर है।