वैष्णो देवी में सुरक्षित होंगे यात्री, श्राइन बोर्ड ने हाईटेक व्यवस्था किया शुरू : जाने क्या क्या है

जम्मू : कटड़ा माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उच्च स्तरीय सुविधाएं देने के लिए, “श्राइन बोर्ड” हाईटेक व्यवस्था शुरू करने जा रही है। श्रद्धालुओं को लूटखसोट से बचाने के लिए घोड़ों व खच्चरों पर चिप लगाने, श्रद्धालुओं को हेलमेट व अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के अलावा भवन मार्ग पर मोबाइल टीमें बनाने व प्रीपेड सेवा काउंटर स्थापित करना शामिल है। घोड़ों व खच्चरों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन “आरएफआइडी” चिप लगेगी। इससे रास्ते में बने स्मार्ट कार्ड स्केनिंग काउंटरों से घोड़ों की स्थिति पर नजर रहेगी। इससे जहां घोड़े वाले श्रद्धालुओं से मनमाना दाम नहीं वसूल सकेंगे।

वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हेलमेट व सुरक्षा कवच मुहैया कराए जाएंगे| जिससे गिरने पर श्रद्धालु सुरक्षित रहें। इससे पूर्व घोड़ों से गिरने के दर्जनों हादसे हो चुके हैं। वैष्णो देवी भवन और मार्ग पर घोड़ा, पिट्ठू और पालकी सेवा उपलब्ध कराने के लिए 10,000 मजदूर काम करते हैं| मगर इन सेवाओं को लेकर श्रद्धालुओं को ओवर चार्जिग, दु‌र्व्यवहार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। “श्राइन बोर्ड” प्रशासन ने, जी मैक्स आइटी सिक्योरिटी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। यह कंपनी आधुनिक तरीके श्रद्धालुओं की वैष्णो देवी यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित बनाएगी। बेस्ड ऑन टोल, प्रोजेक्ट के तहत उक्त कंपनी अगले पांच साल तक अपनी सेवाएं देगी। इसके तहत कंपनी भवन मार्ग पर चलने वाले करीब 4,600 घोड़ों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन “आरएफआइडी” माइक्रो चिप लगाएगी। घोड़ा, पिट्ठू, पालकी व अन्य तकरीबन मजदूरों के बायोमीट्रिक स्मार्ट कार्ड बनाएगी। सभी मजदूरों के साथ ही घोड़ों पर निगरानी के लिए कंपनी वैष्णो देवी भवन और सभी मार्गो पर अत्याधुनिक काउंटर स्थापित करेगी। वहीं काउंटर वैष्णो देवी भवन, बैटरी कार स्टैंड. भैरो घाटी, हिमकोटि, सांझी छत, आद्कुंवारी, चरण पादुका, बाण गंगा, चेतक भवन और नए ताराकोट मार्ग पर स्थापित होंगे।इन अत्याधुनिक काउंटरों में “हाईडेफिनेशन सीसीटीवी कैमरे” और “एलईडी स्क्रीन” लगेंगी। साथ ही जगह-जगह “आरएफआइडी सेंसर एंटीना” लगाए जाएंगे| जिससे घोड़ा और मजदूर पूरी तरह से निगरानी में रहेंगे। घोड़ा करते समय श्रद्धालुओं को सुरक्षा के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हेलमेट और सुरक्षा उपकरण दिए जाएंगे| जो पूरी तरह से निशुल्क होंगे। श्रद्धालु सुरक्षा उपकरणों और हेलमेट का उपयोग करने के बाद संबंधित मजदूर को वापस सौंपेंगे। अगर यात्रा के दौरान मजदूर या फिर घोड़ा चालक श्रद्धालु के साथ दु‌र्व्यवहार या फिर पैसे की मांग करता है, तो वह सीधे निगरानी तंत्र के जरिए पकड़ में आ जाएगा| उसका कार्ड जब्त हो जाएगा। इसके बाद वह तब तक काम नहीं कर सकेगा जब तक पुलिस, एसडीएम या फिर श्राइन बोर्ड अधिकारी उक्त मजदूर को इजाजत नहीं देगा। कंपनी भवन मार्ग पर मोबाइल टीमें बनाएगी, जो भवन मार्ग पर घोड़ों के साथ ही मजदूरों की जांच करेंगी। टीमें श्रद्धालुओं से भी फीडबैक लेंगी। व्यवस्था को यकीनी बनाने के लिए कंपनी करीब 200 अधिकारी व कर्मचारी तैनात करेगी। पूरी व्यवस्था की निगरानी कंपनी के साथ ही श्राइन बोर्ड प्रशासन, एसडीएम भवन और एसडीएम कटड़ा करेंगे, जिसके लिए श्राइन बोर्ड के कटड़ा के आध्यात्मिक केंद्र में मुख्यालय बनाया जा रहा है। कंपनी 28 से 30 रुपये प्रति मजदूर जीएसटी युक्त शुल्क वसूलेगी तो दूसरी ओर मजदूर को 24 घंटों के बाद उसकी मजदूरी दी जाएगी। इस समय इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए कंपनी जोरों से काम कर रही है। नवरात्र में शुरू होगी व्यवस्था कंपनी के अधिकारियों का कहना है, कि अक्टूबर में नवरात्र में इस व्यवस्था को शुरू कर दिया जाएगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सभी तरह की परेशानियों से निजात मिले इसलिए यह व्यवस्था लागू करने जा रहे हैं| ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुखमय के साथ ही सुरक्षित बनी रहे। ताराकोट मार्ग पर हाईटेक मल्टीपर्पज ऑडियो सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। मार्ग पर 15 बूथ और 550 स्पीकर लगाएं जाएंगे। श्रद्धालु धार्मिक संगीत सुन सकेंगे। संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा की देखरेख में डोगरी भाषा में भेंट, मंत्र और धार्मिक गीत पेश होंगे। प्रतिदिन 25 हजार श्रद्धालु आते हैं| जबकि शारदीय व चैत्र नवरात्र के अलावा गर्मी की छुट्टियां यात्रा का आंकड़ा 45 हजार से अधिक हो जाता है। कटड़ा से लेकर भवन तक पारंपरिक मार्ग 13.5 किमी है। जबकि बैटरी कार मार्ग 11.5 किमी है। नया ताराकोट मार्ग बाणगंगा से भवन तक 14.5 किमी है। “गर्गश्राइन बोर्ड” के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशुल गर्ग ने कहा, कि श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुविधाएं मुहैया कराना बोर्ड की प्राथमिकता है। जल्द ही कई बड़ी व्यवस्थाएं शुरू की जा रही हैं। इसका मकसद श्रद्धालुओं को सुरक्षा के साथ लूट खसोट से बचाना है।