शिवसेना: कांग्रेस दिल्ली का मीना बाजार बन गई है, जहां सिर्फ पुराने ग्राहक घूमते नजर आते हैं

मुंबईः शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने पर कांग्रेस पार्टी की जमकर खबर ली गई है. सामना में लिखा हैं, ’73 वर्षीय सोनिया गांधी को फिर कांग्रेस की कमान संभालने के लिए आगे आना पड़ा. सोनिया गांधी बार-बार बीमार पड़ती हैं. इलाज के लिए उन्हें विदेश जाना पड़ता है. बीच-बीच में उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने की खबरें आती रहती हैं. ऐसी स्थिति में कांग्रेस का नेतृत्व करने का बोझ उन्हें उठाना पड़ रहा है, ये अमानवीय है.’

राहुल के फैसले की तारीफ
सामना में आगे लिखा है, ‘राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे को 75 दिन बीत चुके हैं. कांग्रेस की नीति के अनुसार नए अध्यक्ष को चुना जाए, ऐसा राहुल गांधी का कहना था. अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर का हो, ऐसा भी उन्होंने कहा था. गांधी परिवार की बैसाखी त्यागें व पार्टी अपने दम पर खड़ी हो, ऐसा राहुल गांधी ने कहा. पार्टी द्वारा मान-मनौव्वल किए जाने के बाद भी वे पीछे नहीं हटे यह महत्वपूर्ण है. कुछ लोगों द्वारा प्रियंका गांधी का नाम आगे लाते ही राहुल गांधी ने उन्हें फटकार लगाई…

…कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगता रहा है और इसके लिए गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया जाता है. इसमें से राहुल गांधी ने यह निर्णय लिया और उनके निर्णय का सम्मान होना जरूरी था. लेकिन 75 दिनों के बाद कांग्रेस को गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष नहीं मिला व 73 वर्षीय सोनिया गांधी फिर पार्टी की कार्यकारी अध्यक्षा बन गई हैं.’

कांग्रेस में युवाओं की भर्ती बंद है
कांग्रेस पार्टी में पुराने नेताओं को सामना ने टूटी हुई पंक्तियां करार देते हुए लिखा है, ‘वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व की पहली पंक्ति अस्तित्व में नहीं है. मोतीलाल वोरा, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, ए.के. एंटनी ये ‘सिर्फ’ टूटी हुई पंक्तियां हैं. महाराष्ट्र के सुशील कुमार शिंदे भी उसी पंक्ति के हैं. इस पंक्ति के सहारे कांग्रेस पार्टी का आगे बढ़ना संभव नहीं है. तब भी पार्टी अध्यक्ष पद का झमेला 75 दिनों तक जारी रहा….

….अब भी पार्टी अध्यक्ष के लिए जिन नामों पर चर्चा हुई, ऐसा कहते हैं कि वे नाम मतलब ‘बीमारी की अपेक्षा दवा भयंकर’ ऐसा कहना पड़ेगा. युवाओं के हाथ कांग्रेस की कमान सौंपी जाए ये विचार अच्छा ही था. लेकिन कांग्रेस पार्टी में युवाओं की भर्ती पिछले 25 वर्षों से बंद हो गई है.’

कांग्रेस पार्टी दिल्ली का मीना बाजार बन गई
सामना में आर्टिकल 370 और तीन तलाक के मुद्दे पर भी कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए लिखा है, ‘लोकसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार बुरी हार के बावजूद भी ‘हम ही देश पर राज करने वाले’ इस ‘मुगलिया’ मानसिकता से कांग्रेस बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं है. संपूर्ण देश अनुच्छेद 370 हटाए जाने का स्वागत कर रहा है, वहीं जीर्ण-शीर्ण कांग्रेस पार्टी ‘370’ के मकड़जाल को अपने शरीर से दूर करने को तैयार नहीं है. उनकी पार्टी में ही इस पर दो-फाड़ हो गया है….

…ट्रिपल तलाक के संदर्भ में राजीव गांधी द्वारा की गई भयंकर गलती को इस बार सुधारा जा सकता था. लेकिन कांग्रेस ने इतिहास की गलतियों से सीखने की तैयारी नहीं दिखाई इसलिए कांग्रेस पार्टी दिल्ली का मीना बाजार बन गई है. पुराने ग्राहक वहां घूमते नजर आते हैं सिर्फ इतना ही. कांग्रेस के पतन के लिए मोदी-शाह जिम्मेदार न होकर वे खुद ही जिम्मेदार हैं. 73 वर्षीय सोनिया गांधी के कंधों पर भार सौंपकर कांग्रेस ने बचा-खुचा सत्व भी गंवा दिया है.’