सृष्टि का रहस्य और रहस्यमय होना भी एक रहस्य है, जाने इससे जुड़ी घटनाओ के बारे में

नई दिल्ली : यदि विज्ञान या अध्यात्म से तुम्हारे भीतर विस्मय या भक्ति का भाव नहीं जगा, तो तुम गहरी नींद में हो। सृष्टि का रहस्य और रहस्यमय होता जाता है। उस रहस्य में डूबना भक्ति है, और उसे स्वीकार करने से, सम्मान देने से, वह रहस्य प्रकट हो जाता है|वहीं पवित्रता का उदय होता है। इसीलिए पश्चिम के विपरीत पूरब में रहस्य को हेय नहीं, बल्कि श्रेष्ठ दृष्टि से देखा जाता है। प्रकृति के पास कई रहस्य हैं। पश्चिमी देशों में आमतौर पर रहस्यों को हेय दृष्टि से देखा जाता है|

कुछ छुपाया है, तो वह शर्मनाक होगा। जबकि पूरब में रहस्यों का सम्मान किया जाता है और उन्हें पवित्र माना जाता है। विज्ञान का काम है उस रहस्य की गहराई तक जाना और अध्यात्म का अर्थ है रहस्य का सम्मान करना। विज्ञान व अध्यात्म दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का ध्येय एक ही है। टेक्नोलॉजी का प्रयोजन है, मनुष्यों का जीवन आरामदायक बनाना। मानवीय गुणों के बिना टेक्नोलॉजी प्रकृति को निर्जीव वस्तु समझती है। विज्ञान से प्राकृतिक जीवन को समझने में मदद मिलती है और अध्यात्म से प्रकृति जीवंत हो जाती है। बच्चों की दृष्टि से देखें तो उनके लिए कुछ भी प्राण-विहीन नहीं है। जानवर, पेड़, सूरज और चांद सभी में जीवन है, भावनाएं हैं। परंतु किसी तनावग्रस्त, अज्ञानी व्यक्ति की दृष्टि से देखें तो मनुष्य भी रोबोट या किसी वस्तु जैसे हो जाते हैं। तो विज्ञान से प्रकृति के रहस्य की गहराई में जाते हैं और स्व की गहराई का अनुभव करना अध्यात्म है। यह सृष्टि एक रहस्य है। सृजन का कार्य रहस्यमय ढंग से संपन्न होता है। यह प्रकृति का स्वभाव है। रात्रि में प्रकृति पूरी दुनिया को अंधकार से ढक देती है, और प्रात: फिर से प्रकट कर देती है। एक बीज बहुत ही रहस्यमय ढंग से मिट्टी में ढका रह कर अंकुरित होता है। एक बार अंकुर फूट पड़ा तो वह बाहर आ जाता है। उसी तरह, जड़ मिट्टी में बहुत गहरे जाती है। एक पेड़ जितना लंबा होता है, उसकी जड़ भी उतनी गहरी होती है। हर अभिव्यक्ति का विरोधी मूल्य भी होता है, अनभिव्यक्ति, रहस्य। एक ज्ञानी व्यक्ति किसी रहस्य को छुपाने का प्रयास नहीं करता और ना ही उसे प्रकट करने का प्रयास करता है। पांच रहस्य हैं, जो बहुत ही पवित्र हैं और सूक्ष्म रूप से देवता उनकी रक्षा करते हैं। यह रहस्य हैं, जन्म रहस्य: जन्म एक रहस्य है। एक आत्मा कैसे शरीर धारण करती है, कैसे जन्म स्थान चुनती है, जन्म का समय, शरीर का प्रकार, माता-पिता, यह सभी एक रहस्य है। मरण रहस्य: मृत्यु का रहस्य बहुत ही गुप्त है। प्राण से शरीर का बिछड़ना और उसके बाद की यात्रा एक रहस्य है। राज रहस्य: सृष्टि की व्यवस्था और संचालन के नियम एक रहस्य हैं। प्रकृति रहस्य: जितना अधिक प्रकृति के बारे में जान जाते हैं, उतना ही वह रहस्य गहराता जाता है। वैज्ञानिक ढंग से प्रकृति के रहस्यों को जानने वाले वैज्ञानिक यह पाते हैं कि जितना वे जानते हैं, उससे कहीं अधिक रहस्य खुलने बाकी रह जाते हैं। मंत्र रहस्य: मंत्र और उनके प्रभाव, कार्यप्रणाली यह सभी रहस्यमय हैं। मंत्र, चेतना से प्रस्फुटित एक दिव्य तरंग है और चेतना स्वयं ही एक रहस्य है। जब तुम किसी चिह्न, स्थान, समय, व्यक्ति या प्रक्रिया को पवित्र समझते हो तो तुम्हारा ध्यान कहीं बंटता नहीं है, पूर्ण रहता है। जब एक ही प्रक्रिया बार-बार करते हो, तब उसकी पवित्रता तुम्हें कुछ कम लगने लगती है, तुम्हारा ध्यान बंट जाता है, तमस का उदय होता है। तुम्हारी चेतना स्मृति के प्रभाव में आ जाती है और सजगता घट जाती है। वर्तमान क्षण में जीने से और आध्यात्मिक साधना से हम अपने जीवन में पवित्रता के भाव को जीवित रखते हुए जीवन के रहस्य में जीते हैं। चेतना की टेक्नोलॉजी है अध्यात्म। पूरी दुनिया ही इस चेतना शक्ति का खेल है। जो व्यक्ति इस अद्भुत सृष्टि को देख विस्मित नहीं होता, उसकी आंखें अभी खुली नहीं हैं। इस सृष्टि में क्या रहस्यमय नहीं है? जन्म एक रहस्य है। मृत्यु भी रहस्य है। जीवन ही सबसे बड़ा रहस्य है। और इस सृष्टि तथा जीवन के रहस्य में पूरी तरह डूब जाना समाधि है।