हिंदी-साहित्य ही नही जगत-साहित्य में निराली है रामचरितमानस

रामकुमार सिंह

महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश आनंदी बेन पटेल के जन्मदिन पर विशेेष

स्तम्भ: एक सुखद सुंदर मनोहारी तस्वीर,उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश कि राज्यपाल महोदया महामहिम आनंदी बेन पटेल के जन्मदिवस के अवसर पर उपहार स्वरूप पूज्यनीय पठनीय ग्रंथ श्रीरामचरितमानस भेट करते हुये तस्वीरे साझा की,इन सामान्य औपचारिक तस्वीरो में वैसे तो कुछ खास नजर नही आता।लेकिन यदि इसे एक विशेष दृष्टिकोण से देखे तो ज्ञात होगा,चूँकि योगी जी प्रदेश के मुखिया होने के साथ ही एक उच्च चेतना शिखर को प्राप्त नाथ संप्रदाय कि विशेष पीठ ‘गोरक्षापीठ’ के पीठीधीश्वर भी है और कोई संत अगर किसी को उपहार स्वरूप कुछ भेट करता है तो उसका उपहार निश्चित रूप से उत्कृष्ट ही होगा। भौतिक वस्तुये तो प्राय: सभी भेट करते है किंतु ऐसा आध्यत्मिक ग्रंथ जिसका स्थान हिंदी-साहित्य में ही नही,जगत-साहित्य में निराला हो ऐसे महान ग्रंथ को राज्यपाल महोदया को उपहार स्वरूप भेट करना योगी जी कि आध्यात्मिक गूढता का परिचायक हैं।

श्रीरामचरितमानस ऐसा विलक्षण ग्रंथ हैं जिसको लिपिबद्ध तो गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया किंतु उसके रचयता स्वंय भगवान शिव ही है। कहते हैं मूल रामचरितमानस तो भगवान शिव के ह्रदय में निवास करने वाली प्रभु राम कि सच्चिदानंद स्वरूप अविरल भक्ति हैं। जो भगवान शिव ने गोस्वामी तुलसीदास के मानस पटल पर अवतरित हो लिपिबद्ध करवाई।

राम जिनके ईष्ट शिव और शिव जिनके ईष्ट प्रभु राम। कैसी अद्भुत लीला हैं प्रभु कि,’ब्रह्मा विष्णु महेश’ उनकी शक्ति परा अम्बा ‘महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती’ के त्रिगुण रूप ‘सत रज तम’ से सृष्टि का निर्माण पालन और संहार समाहित रहते हुये,अविनाशी सच्चिदानंद स्वरूप मे एकीकृत समस्त शक्तियो के साथ,तटस्थ भाव से स्थित रहना,साथ ही संसार में सभी जड चेतन में विद्मान अपने अंश को निरंतर गतिमान रखना।जैसे सूर्य प्रकट रूप से तटस्थ स्थित रहते हुये अपनी किरणो के पोषण व प्रकाश से समस्त संसार को प्राण रूपी ऊर्जा प्रदान करता है और सबसे निर्लिप्त भी रहता हैं।आप सूर्य के प्रकाश से लाभांवित होते हैं किंतु उसे तब तक पकड़ नही सकते जब तक सूर्य के प्रकाश में स्वयं को परिवर्तित करने की क्षमता उत्पन्न नही कर लेते। रामचरितमानस ऐसा ही अद्भुत ग्रंथ है जो पोषित होने वाले यानि ईश्वर अंश को ईश्वर में परिवर्तित होने मे समर्थ बना सकता हैं।

मानस ऐसा ही विलक्षण ग्रंथ है जिसकी महिमा हैं ‘छहो शास्त्र सब ग्रंथन को रस’ यानि धर्म अध्यात्म व वेद पुराणो में जो भी ज्ञान उपस्थित है उस सबका का निचोड रामचरितमानस में उपस्थित है बस चाहिए मानस के श्लोक,दोहा,सोरठा में निहित सिद्धांतो के रहस्य उद्घाटन कि जिज्ञासा।

रामचरितमानस के दूसरे श्लोक में ..
“ भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्र्वासरूपिणो।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धा: स्वान्त:स्थमीश्र्वरम्।।

यानि भवानी (श्रद्धा ) शंकर ( विश्वास ) को श्रद्धा विश्वास स्वरूप में वंदित किये वगैर सिद्धजन भी अपने अंत: करण में स्थित ईश्वर को नही देख पाते हैं तो सामान्य व्यक्ति कि बात ही क्या।
रामचरितमानस मे बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,
किष्धिन्धाकाण्ड,सुदंरकाण्ड,लंकाकाण्ड,
उत्तरकाण्ड के रूप में भक्ति शाखा कि सात सीढियॉ उपस्थित है जिनके सिद्धांतो को व्यक्ति अपने जीवन मे आत्मसात कर संसार के भवसागर को गाय के खुर के समान पार कर पाने में समर्थ हो जाता है। इस महान ग्रंथ कि ऐसी महिमा संतो ने बखान की है। जो किवदंती मात्र नही विज्ञान के प्रयोगो कि तरह सुस्पष्ट है बस देर है इस ग्रंथ कि गूढता व सिद्धांतो को प्रयोग कर समझने व आत्मसात करने कि, समझ मे आते ही मानव जीवन के दैहिक दैविक भौतिक त्रितापो से मुक्ति का मार्ग स्वयं खुल जाता हैं। जिस पर भक्ति ज्ञान वैराग्य प्रेम और निर्भयता रूपी सीता राम लक्ष्मण भरत शत्रुघन रूपी पंचम गुणो द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप कि प्राप्ति संभव है। ऐसा मानस के नायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने मानस के सिद्धांतो पर प्रयोग द्वारा स्वयं स्वरूप कि प्राप्ति को उपलब्ध होने का उदाहरण प्रस्तुत कर संसार को मार्गदर्शित किया हैं। उन्होने अपने जीवन मे सर्व समर्थ होते हुये भी कोई चमत्कार नही किये बल्कि मनुष्य कि कठिनाइयों को मनुष्यता कि सीमाओ मे रहकर निदान प्रस्तुत किए।

मानस संसार में पशुता को मनुष्यता में परिवर्तित करने व गृहस्थ जीवन को उत्कृष्टता प्रदान करने वाला सबसे विलक्षण ग्रंथ हैं। जिसके गूढ एंव सर्व सुलभ सूत्रो को अगर व्यक्ति अपने जीवन में आत्मसात कर ले,तो उसको मानव जीवन के उद्देश्य कि प्राप्ति निसंदेह हो सकती हैं। मानस के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति आदर्श गुरू-शिष्य,पुत्र-पुत्री,पति-पत्नी, माता-पिता,भाई-बंधु,सखा-मित्र,सेवक,
राजा-प्रजापालक आदि दायित्वों का आदर्श प्रस्तुत कर सकता हैं।

ऐसे विलक्षण ग्रंथ को कोई संत जब किसी को भेट करता हैं तो उसके निहतार्थ अलग होते हैं क्योंकि संत व्यक्तित्व को श्रीरामचरितमानस कि गूढता का भान भलिभाँति होता हैं। उत्तर प्रदेश के मुखिया द्वारा उत्तर प्रदेश कि प्रथम महिला राज्यपाल महोदया को जन्मदिन पर ऐसी विलक्षण भेट के लिए साधुवाद।