51 शक्तिपीठों में से एक है ‘देवी पाटन’, घंटा बजते ही भोजन के लिए इकट्ठा हो जाते हैं पशु, पक्षी

लखनऊ : देवी पाटन मंदिर देश भर के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के अंतर्गत तुलसीपुर क्षेत्र में स्थित है। मान्यता है कि ईश्वरीय शक्ति न सिर्फ मनुष्य में बल्कि सृष्टि के सभी प्राणियों में मौजूद है। यही कारण है कि इस मंदिर में सबसे पहले पशु पक्षियों को प्रसाद खिलाया जाता है उसके बाद ही भक्तों को प्रसाद बांटा जाता है।
देवी पाटन मंदिर भारत-नेपाल के बीच मित्रता को न केवल सतत अक्षुण्ण बनाये हुए है, वरन् उसे प्रगाढ़ बनाये रखने में महती भूमिका निभाता है। नेपाल के दांग-चोघड़ा मठ में स्थापित पीर रत्ननाथ को सिद्धि भी देवीपाटन में मिली थी। भगवान शिव के अवतार के रूप में अवतरित गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य रत्ननाथ के दो मठ थे। रत्ननाथ की तपस्या से खुश होकर माँ साक्षात् प्रकट हुई और वर मांगने के लिए कहा तो पीर रत्ननाथ ने उनसे यही वर मांगा कि उनकी पूजा इस मठ में भी हो। माँ दुर्गा ने उनको ऐसा ही आशीर्वाद दिया। देवीपाटन मंदिर में नेपाल से पीर रत्ननाथ की शोभायात्रा प्रत्येक वासंती नवरात्र की पंचमी को यहां पहुंचती है और पांच दिन तक वहां से आये पुजारियों द्वारा मंदिर में पूजा के साथ-साथ रत्ननाथ की भी पूजा की जाती है। इस दौरान मंदिर में लगे घंटे आदि नहीं बजाये जाते हैं। रत्ननाथ की पूजा में शामिल होने के लिए भारत और नेपाल के हजारों श्रद्धालु भी इस अवसर पर मौजूद रहते हैं।देवीपाटन नेपाल के सिद्ध योगी बाबा रतननाथ की शक्ति उपासना का स्थल है। जहां वे प्रतिदिन योगशक्ति से नेपाल के दांग पहाडी से आकर महामाया पाटेश्वरी की पूजा करते थे। अब उनकी भी पूजा यहां पर होती है। ऐसा माना जाता है, कि चैत्र शुक्ल पंचमी से एकादशी तक बाबा रतननाथ पाटन में अप्रत्यक्ष रुप से मौजूद रहते है। नवरात्रों में यहां भव्य मेला लगता है। मंदिर के मुख्य महंत मिथिलेश नाथ योगी बताते हैं कि “मंदिर की देवी को प्रसाद चढ़ाने के बाद मंदिर के आसपास के पशु पक्षियों में उस प्रसाद को बांटा जाता है। इसके बाद ही वह प्रसाद अन्य भक्तों को दिया जाता है। जब मंदिर का घंटा बजता है तो आसपास के क्षेत्र के सभी पक्षी बड़ी संख्या में मंदिर परिसर में भोजन के लिए इकठ्ठा हो जाते हैं। देवी मां को चढ़ाये गए प्रसाद को भी ये सभी पक्षी बहुत आंनद के साथ मिल बांट कर खाते हैं। मंदिर के मुख्य संरक्षक यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हैं। उनका पशु पक्षियों के प्रति प्रेम तो सभी को पता है। इस मंदिर में गौ शाला तथा अनेक पक्षियों के घर के रूप में घरोंदे बने हुए हैं। यहां पर नाथ सम्प्रदाय से जुड़े देश विदेश के भक्त आते हैं और इन पशु पक्षियों की सेवा कर पुण्य अर्जित करते हैं।