एएलएस, अल्जाइमर और पर्किन्सन में शरीर को नुकसान पहुंचाता है खुद का प्रतिरक्षा तंत्र

बुढ़ापे में होने वाली बीमारियां काफी दुश्वारियां लाती हैं, इसमें एक ओर तो शरीर का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है तथा उम्र बढ़ने के साथ होने वाले दिमागी विकारों के कारण भी शरीर को काफी क्षति पहुंचाता है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के वैज्ञानिकों द्वारा फ्रूट फ्लाई पर एक शोध किया गया। इसमें सीडीके-फाइव नामक जीन (प्री क्लीनिकल स्टडी में शुरूआती दिमाग विकास में महत्वपूर्ण और न्यूरोडिजनरेटिव डिसीज जैसे एएलएस, अल्जाइमर और पर्किन्सन के लिए जिम्मेदार) को एल्टर कर उसके क्रियाकलाप को बदल डाला गया। इस शोध दल में लखनऊ के भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में शोधार्थी रहे और एनआईएच अमेरिका में कार्यरत अरविंद कुमार शुक्ला की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस शोध में अरविंद कुमार शुक्ला के साथ शामिल वैज्ञानिकों-जोशुआ स्परर, एरिना कुजिना और एडवर्ड गिनिगर के दल ने इससे पूर्व म्यूटेंट मक्खी पर किए शोध में यह भी पता लगाया था कि सीडीके-फाइव नामक इस जीन में किए गए परिवर्तन से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया की गति बढ़ जाती है जिससे यह मक्खियां सामान्य समय से पहले ही मृत्यु का शिकार हो गई और इनमें दिमाग के क्षतिग्रस्त होने के बड़े पैमाने पर लक्षण मिले है। यहीं नहीं इन मक्खियों का उड़ना और चलना भी बाधित हो गया था। सेल रिपोर्ट में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार सीडीके-फाइव में संशोधन करने से पुरानी मक्ख्यिों के दिमाग में डोपामिनर्जिक न्यूरान कम हो जाते है और पर्किन्सन की बीमारी में यही कोशिकाओं में क्षति का नुकसान मनुष्यों को भी उठाना पड़ता है। इसी शोध में आगे यह भी पाया गया है सीडीके-फाइव में बदलाव के बाद डोपामाइन न्यूरान इसलिए खत्म होता है क्योंकि इससे कोशिका का वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम (क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को शरीर में सीमित करने व हटाने का जिम्मेदार) या ऑटोफाजी प्रक्रिया भी धीमी हो जाती हैं। इससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मक्खी के अपने न्यूरान पर हमला करके उन्हें नुकसान पहुंचाने लगता है। प्रतिरक्षा तंत्र का यह हमला काफी घना होता है और ऑटोफाजी प्रक्रिया से भी तेजी से फैलता है। हालांकि कोशिका वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम को दोबारा सक्रिय करने और प्रतिरक्षा तंत्र के अतिरिक्त कार्य को बाधित करने से सीडीके फाइव में बदलाव से डोपामाइन न्यूरॉन में होने वाली कमी रूकती है। शोध में यह तथ्य पाया गया कि ऑटोफाजी प्रक्रिया रूकने से बहुत बड़े स्तर पर प्रतिरक्षातंत्र की विंध्वंसक प्रक्रिया मनुष्य के दिमाग में कुछ न्यूरोडिजनरेटिव डिसआर्डर के दौरान शुरू होती है। अरविंद कुमार शुक्ला ने उम्मीद जताई कि इस शोध की मदद से न्यूरोडिजनरेटिव और उम्र बढ़ने से होने वाले मस्तिष्क विकार के इलाज के लिए नई रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।

 

 

 

 

 

आदित्य श्रीवास्तव