जातीय समीकरण को संतुलित करने में जुटी भाजपा

सुरेश बहादुर सिंह
फाइल

लखनऊ, 11 अगस्त, दस्तक टाइम्स : वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश में जातीयता की राजनीति को लगभग खत्म कर दिया था। आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल एक बार फिर जातीय समीकरणों का तानाबाना बुनकर भाजपा को घेरने की तैयारी कर रही है। भाजपा भी विपक्षी दलों की इस चाल को भांपते हुए जातीय समीकरणों का संतुलन बनाने की तैयारी में जुट गई है। जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा चुनाव का प्रत्याशी घोषित करके भाजपा ने विपक्षी दलों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने का फैसला कर लिया है।

राम मन्दिर निर्माण के बहाने भाजपा ने हिन्दू मतों को एकजुट करने का जो प्रयास किया था, उसी का परिणाम था कि 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव व 2017 के विधानसभा चुनाव में उसे भारी बहुमत मिला था। भाजपा ने हाल ही में राम मन्दिर नींव का शिलान्यास कर यह संदेश दे दिया कि उन्होंने राम मन्दिर निर्माण का जो वायदा किया था उसे पूरा कर दिखाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भव्य समारोह के माध्यम से जिस तरह राम मन्दिर निर्माण की नींव डाली, उससे हिन्दू समुदाय एक बार फिर भाजपामय दिखाई देने लगा है। हिन्दुओं में भाजपा के प्रति रुझान में भी बढ़ोत्तरी हुई है। भाजपा की लोकप्रियता को देखते हुए विपक्षी दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण की राजनीति के माध्यम से चुनौती देने का निर्णय लिया है।

भाजपा को ब्राम्हण विरोधी बताने में जुटे कुछ दल

योगी शासनकाल में जिस तरह से अपराधियों पर शिकंजा कसा जा रहा है उससे अपराधी भी सकते में हैं लेकिन विकास दूबे जैसे कई जघन्य अपराधी को मार कर सरकार ने यह संकेत दिया कि योगी के शासनकाल में अपराधियों को महिमामंडित नहीं किया जा सकता, फिर भी कुछ राजनीतिक दल इसे जातीय समीकरण से जोड़कर भाजपा को ब्राह्मण विरोधी करार देने में जुट गये हैं, हालांकि उन्होंने भगवान परशुराम का हवाला देकर ब्राह्मण सम्मान से जोड़ने का प्रयास किया है। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को राज्यसभा का प्रत्याशी न बनाये जाने को भी वह भाजपा के ब्राह्मण विरोध की संज्ञा दे रहे हैं और पूरे प्रदेश में भाजपा को ब्राह्मण विरोधी साबित करने में जुट गये हैं।

पूर्वांचल में निषाद समाज की महत्वपूर्ण भूमिका

विपक्षी दलों की इस चाल को भांपते हुए भाजपा ने पिछड़े वर्ग का कार्ड खेलना शुरू कर दिया है, हालांकि भाजपा ने जय प्रकाश निषाद को पार्टी में उचित सम्मान देने का निर्णय पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही किया था। ज्ञात हो कि पूर्वांचल में निषाद किसी भी पार्टी के प्रत्याशी की जीत हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निषाद पार्टी के मतों को भाजपा के पाले में लाने के लिए जय प्रकाश निषाद को उचित सम्मान देने का आश्वासन दिया था। भाजपा ने मंगलवार को जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर अपना वायदा पूरा किया है।

आगामी दिनों में भी भाजपा कर सकती है नए प्रयोग

भाजपा के इस निर्णय को सभी दल जातीय समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि राम मन्दिर के नाम पर हिन्दू समुदाय को भाजपा पहले ही अपने पक्ष में जोड़ चुकी है। अब उनकी नजर जातीय समीकरणों पर है। जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने निषाद समुदाय में अपनी गहरी पैठ बनाने का प्रयास किया है। आगामी दिनों में भाजपा इसी तरह के कई प्रयोग कर सकती है जो विपक्षी दलों के प्रयासों पर पानी फेरने का काम करेंगे।

विपक्षी दलों को उन्हीं की चाल से मात देने की कोशिश

भाजपा की नजर 2022 के विधानसभा चुनाव पर है। भाजपा एक बार फिर योगी के नेतृत्व में 2017 की सफलता दोहराना चाहती है यह तभी संभव जब सभी है भाजपा सभी मोर्चे पर विपक्षी दलों को उन्हीं की चाल से मात दे, हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा की जीत के प्रति काफी आश्वस्त हैं।