योगी राज में भी ‘लव जेहाद’ परवान पर

संजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी जिन दिन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में आई है तब से लेकर आज तक विपक्ष योगी सरकार के खिलाफ हर समय नये-नये सियासी ‘षड़यंत्र’ रचने में लगा रहता है। कभी कथित तौर पर प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था की आड़ उन्हें घेरा जाता है तो कभी ठाकुरवाद फैलाने के लिए कोसा जाता है।

‘लव जेहाद

योगी को ब्राहमण विरोधी बताया जाता है तो उनके राज में दलितों पर अत्याचार बढ़ने का ढिंढोंरा भी खूब पीटा जाता है। कोरोना महामारी के समय भी ऐसा ही कुछ चल रहा है। कोरोना को लेकर विपक्ष जनता को जागरूक करने की बजाए कोरोना की आड़ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नाकारा साबित करने की मुहिम चलाए हुए है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव,बसपा सुप्रीमों मायावती, कांगे्रस की उत्तर प्रभारी प्रियंका वाड्रा और इन सब के चेले-चपाटों का कोई दिन ऐसा नहीं जाता होगा जब यह योगी सरकार को लानत-मलानत नहीं भेजते हों। हाल यह है कि एक तरफ विपक्ष शोर मचाता है कि प्रदेश में जंगलराज कायम है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं,लेकिन जब उत्तर प्रदेश पुलिस प्रदेश का अमन-चैन बिगाड़ने वाले किसी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराती है तो विपक्षी नेता छाती पीट-पीटकर प्रलाप शुरू कर हैं।

तब माया-अखिलेश या प्रियंका को अपराधी का अपराध नहीं उसकी जाति दिखाई पड़ती है। यह नेता अपराधी की जाति तलाश कर वोट बैंक की सियासत शुरू कर देते हैं। योगी विरोधी नेताओं ने अपराधियों को भी जातियों में बांट दिया है। जिस मारे गए अपराधी की जाति विशेष का जितना मजबूत वोट बैंक है,उतना ही हो-हल्ला योगी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष द्वारा मचाया जाता है।

उत्तर प्रदेश में वोट बैंक के सियासी नासूर के चलते ही, विपक्ष तमाम ऐसे मुददों पर मुंह नहीं खोलता है, जिससे किसी वर्ग विशेष का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। खासकर, मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी मोल नहीं लेने के चक्कर में मायावती से लेकर अखिलेश यादव और प्रियंका वाड्रा सहित अन्य तमाम नेता इस बिरादरी से आने वाले बड़े से बड़े अपराधी के गुनाह को देखने से कतराते रहते हैं।

यही वजह है प्रदेश में खूखांर अपराधी मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे लोग इन पार्टियों से टिकट पाकर लोकसभा और विधान सभा तक में पहुंच कर ‘माननीय’ बन जाते हैं। गुंडई के बल पर अकूत सम्पदा एकत्रित करते हैं। हिन्दुओं को खुले आम गाली देने वाले सपा नेता आजम खान मंत्री तो कांगे्रस से चुनाव जीतकर इमरान मसूद विधायक बन जाते हैं। इसी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करने वाले नेताओं द्वारा लम्बे समय से प्रदेश में बढ़ती लव जेहाद की घटनाओं को भी अनदेखा किया जाता है।

बसपा की मायावती, सपा के अखिलेश और कांगे्रस की प्रियंका वाड्रा जब तुष्टिकरण की सियासत के चलते मुसलमानों के ‘तलुए चाटते’ हों तो फिर हिन्दू लड़कियों को लव जेहाद जैसी घटनाओे का शिकार होने से कैसे बचाया जा सकता है। आखिरकार, लव जेहाद की मुहिम चलाने वालों को भी पता है कि उनके सियासी आका उनका (लव जेहादियो का) बाल भी बांका नहीं होने देंगे। लव जेहाद की मुहिम चलाने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हेंमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी खौफ नहीं है।इसी लिए प्रदेश में लखीमपुर- खीरी, मेरठ, कानपुर सहित तमाम जिलों में लव जेहाद की घटनाएं सामने आ रही हैं।

लव जेहाद का विरोध करने वाली हिन्दू लड़कियों को मौत के घाट उतारने से भी यह जेहादी बाज नहीं आते हैं। ऐसे ही एक घटना लखीमपुर-खीरी में सामने आई जहां एक दलित छात्रा को लव जेहाद के चलते दुष्कर्म और बाद मेें जान तक गवाना पड़ गई। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में दलित छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में लव जेहाद का मामला सामने आने के बाद अब इस केस में आरोपित के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है

योगी सरकार ने साफ कह दिया है कि छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में आरोपित दिलशाद के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई होगी। इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि इस प्रकरण में केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। सरकार पीड़िता की तरफ से केस लड़ेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार आर्थिक सहायता देने का भी निर्देश दिया है,लेकिन इस मामले पर दलितों की राजनीति करने वाली मायावती और प्रियंका वाड्रा की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए।

गौरतलब हो, लखीमपुर खीरी के नीम गांव थाना क्षेत्र में लव-जिहाद में नाकाम रहने पर आरोपित दिलशाद ने छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना को अंजाम दिया था। छात्रा का शव 25 अगस्त 2020 को तालाब के किनारे मिला था। योगी के सख्त तेवरों के बाद आइजी लखनऊ जोन, लक्ष्मी सिंह भी लखीमपुर खीरी पहुंची। उन्होंने मौके पर जाकर पड़ताल की। लक्ष्मी सिंह ने कहा कि 25 अगस्त को थाना नीमगांव में सूचना मिली थी कि छात्रा (18 वर्षीय) जो एक दिन से लापता थी, उसका शव उसके घर के पास मिला है। आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उधर, लगता है कि यूपी की राजधानी लखनऊ से 70-75 किलोमीटर दूर बसा जिला कानपुर तो इन दिनों लव जिहाद का अड्डा ही बन गया है। एक के बाद एक लव जेहाद के कई मामले सामने आने के बाद जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठनों ने विरोध की आवाज उठाई तो पांच हिन्दू लड़कियों के लव जेहाद का शिकार होने का पता चला। आरोप लग रहे हैं कि शहर में एक संगठित गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सदस्य अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया पर फेक आईडी बनाते हैं।

फिर दूसरे धर्म की लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने के बाद निकाह करते हैं। संगीन आरोपों से पुलिस भी हैरान है। इस मामले में अब आईजी ने एसआईटी का गठन किया है। बताया जाता है कि कानपुर की मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों जैसे लाल कॉलोनी, सफेद कॉलोनी, मछरिया,जाजमऊ, सैयद नगर, छावनी जैसे इलाकों में लव जेहाद गैंग सक्रिय है। शालिनी यादव से फिजा फातिमा बनी युवती की भी दोस्ती फैसल से फेसबुक के जरिए हुई थी। बाद में शालिनी ने धर्म परिवर्तन कर फैसल से निकाह कर लिया है।

हाल में शालिनी यादव समेत कुल पांच लड़कियों के धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के मामले सामने आए हैं। शालिनी यादव के परिवार समेत पांच लड़कियों के परिजनों ने 24 अगस्त 2020 को आईजी रेंज से मुलाकात कर आपबीती सुनाई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि हमारी लड़कियों का ब्रेनवॉश कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया है। हमारी बच्चियों को पुलिस बरामद करे और उनका कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराए।

बर्रा थाना क्षेत्र स्थित बर्रा 6 में रहने वाली शालिनी यादव और किदवई नगर थाना क्षेत्र के मोहम्मद फैसल से बीते 6 साल से प्रेम संबंध थे। शालिनी ने गाजियाबाद में धर्मांतरण कर फिजा फातिमा बनकर फैसल से निकाह कर लिया। शालिनी के परिजनों ने फैसल समेत 7 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। शालिनी यादव के अलावा कल्याणपुर में रहने वाली दो सगी बहनों का मामला भी प्रकाश में आया था।

दोनों सगी बहनों का धर्म परिवर्तन कराने के बाद निकाह करा दिया गया है। परिजनों की शिकायत पर कल्याणपुर पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी, लेकिन प्रेम प्रसंग का मामला बताकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। इसी तरह कानपुर की ही पनकी क्षेत्र में रहने वाली दो सगी बहनों के नाम बदलकर और धार्मिक पहचान छिपाकर प्रेम जाल में फंसाया गया। आरोप है कि उनका धर्म परिवर्तन कराने के बाद निकाह किया गया था। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि पांचों लड़कियों का ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन कराने वाले लड़के एक ही कॉलोनी के रहने वाले हैं।

इन पांचो लड़कियों के परिजनों का भी यही आरोप है कि शहर में लव जिहाद गिरोह सक्रिय है। यदि शहर भर के थानों से इस तरह के मामलों को निकलवाया जाए और इसकी जांच कराई जाए तो एक बड़े गैंग का खुलासा हो सकता है। अक्सर लव जेहाद पर पुलिस का रवैया भी काफी लचर नजर आता है। वीएचपी,बजरंगदल और कथित लव जेहाद का शिकार हुई लड़कियों के परिजनों का आरोप है कि धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का मामला प्रकाश में आता है तो स्थानीय थाने की पुलिस उदासीन रवैया अपनाती है।

पुलिस इस प्रकार के संगठित अपराध के मामलों को प्रेम प्रसंग बताकर कोई कार्रवाई नहीं करती है, जो उन्हें करना चाहिए। परिजन थानों के चक्कर लगाते रहते हैं। इन सबके बीच वे समाज और अपनों के बीच हंसी का पात्र बनते हैं। बहरहाल, योगी सरकार के सख्त रवैये को देखते हुए पुलिस के भी सुर बदलने लगे हैं। आईजी रेंज मोहित अग्रवाल ने लव जिहाद के आरोपों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने एसपी साउथ दीपक भूकर के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया है।

एसआईटी पर धर्म परिवर्तन करने वाली लड़कियों को बरामद करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही वीएचपी और बजरंग दल का आरोप है कि शहर में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराता है। इसकी भी जांच एसआईटी करेगी। धर्मांतरण से संबंधित सभी बिंदुओ की जांच एसआईटी को सौंपी गई है। कानपुर की ही तरह पश्चिमी यूपी के कई जिलों में भी लव जिहाद तेजी से पांव पसार रहा है।

गत दिनों तो हद हो गई जब मेरठ में एक मुस्लिम युवक शमशाद, जिसने हिन्दू नाम रखकर एक हिन्दू लड़की शादी थी। फिर शादी के पांच साल बाद मां-बेटी की हत्या कर घर में ही लाश गाड़ दी। शमशाद उर्फ अमित गुर्जर ने अपना नाम बदलकर 4 साल पहले गाजियाबाद एक युवती से फेसबुक के माध्यम से दोस्ती की और अपने प्रेम जाल में फंसाया और उसको लेकर थाना परतापुर के भूड बराल इलाके में रहने लगा। शमशाद नामक के शख्स ने अपना नाम अमित गुर्जर बताकर पहले शादी रचाई पत्नी के साथ पांच साल रहा भी और उसके बाद मां-बेटी की हत्याकर उनकी लाश घर में ही गाड़ दी।

पुलिस ने शमशाद को गिरफ्तार तो कर लिया है,लेकिन इतने भर से लव जेहाद के नाम पर संगठित अपराध चलाने वाले गैंग के हौसले पस्त पड़ जाएंगे ऐसा नहीं होगा। सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि शमशाद पहले से शादीशुदा था। पुलिस ने उसकी पहली पत्नी को भी साक्ष्य छुपाने-मिटाने के आरोप में दोषी बनाया है। उसकी गिरफ्तार के लिए पुलिस छानबीन कर रही है। इससे पूर्व की कहानी यह है कि जब युवती को शमशाद की असलियत का पता चला तो उसने इस बात का विरोध किया और अपनी दोस्त को इस घटना के बारे में बताया।

उसने अपनी दोस्त से कहा कि शमशाद ने उसे धोखा दिया है और उसे जान का खतरा है। लॉकडाउन के दौरान युवती की अपने सहेली से बातचीत भी बंद हो गई। इस पर जब युवती के सहेली ने शमशाद से अपनी दोस्त से बात कराने को कहा तो उसने बात नहीं कराई। इस बात को लेकर उसे शमशाद पर शक होने लगा। युवती की सहेली ने परतापुर थाने में अपनी सहेली की गुमशुदा होने की शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद जब शमशाद से पूछताछ की तो उसने बताया कि 28 मार्च को उसने मां-बेटी की हत्या करने के बाद शव घर के अंदर जमीन में गाड़ दिया था।

उक्त कुछ घटनाएं तो बानगी भर हैं।लव जेहाद के तमाम मामले तो पुलिस की चैखट तक पहुंच ही नहीं पाते हैं,उन्हें प्रेम प्रसंग बताकर हासिए पर डाल दिया जाता है,जबकि अगर कोई युवक कथित तौर अपना धर्म और नाम बदलकर या छिपाकर किसी युवती को प्रेमजाल में फंसाता है तो ऐसे मामलों को गंभीरतम अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। लव जेहाद में फंसी लड़की स्वयं ही नहीं बल्कि पूरा परिवार और समाज तक इस तरह की घटनाओं से अपने आप को असहाय महसूस करता है।

(यह लेखक के स्वतंत्र विचार है)