केजीएमयू की कमान एक लेफ्टीनेंट जनरल को, जानिये इनके बारे में

लखनऊ (अमरेंद्र प्रताप सिंह) : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रसिद्द किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के नऐ कुलपति के रूप में प्रदेश की राज्यपाल ने लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी को तैनात किया है। लेफ्टिनेंट विपिन पुरी अभी एम्स नई दिल्ली में प्रोफेसर एमेरिटस के पद पर कार्यरत हैं।

यूपी की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की ओर से इनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया है। पदभार की जिम्मेदारी संभालने की तारीख से तीन साल के लिए इन्हे कुलपति बनाया गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता द्वारा इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया गया कि ‘ले.जनरल डॉ विपिन पुरी प्रोफेसर एमेरिटस भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 03 वर्ष के लिए कुलपति नियुक्त किया गया है।’

जाने माने पीडियाट्रिक सर्जन है लेफ्टीनेंट जनरल डॉ पुरी : लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस के डीजी के साथ आर्मी मेडिकल कोर के सीनियर कर्नल कमांडेंट रह चुके हैं। पुणे स्थित आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज से स्नातक लेफ्टिनेंट जनरल पुरी को सेना मेडिकल कोर में आठ दिसंबर 1979 को कमीशंड मिली थी। उन्होंने 1985 में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज से ही जनरल सर्जरी में पीजी किया था, जबकि 1993 में चंडीगढ़ के परास्नातक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन व रिसर्च से एमसीएच किया है। वह जाने माने पीडियाट्रिक सर्जन हैं।

लखनऊ के सेन्ट्रल कमांड में भी रह चुके हैं तैनात : लेफ्टिनेंट जनरल पुरी लखनऊ के सेंट्रल कमांड में भी वह तैनात रह चुके हैं, उन्होंने दिल्ली स्थित आरआर हॉस्पिटल में भी सेवा प्रदान की है। वर्ष 2017 में उनकी सेवाओं के लिए राष्ट्रपति ने विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया था। इससे पूर्व उन्हें जून 2016 में राष्ट्रपति का ऑनरेरी सर्जन नियुक्त किया गया था।

प्रोफ़ेसर एमएलबी भट्ट के जाने के बाद खाली था पद  : बताते चलें कि, विगत 11 अप्रैल को केजीएमयू के कुलपति के रूप में का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा  करने के बाद प्रो.एमएलबी भट्ट को तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था। यह सेवा विस्तार उन्हें कोविड-19 महामारी के चलते दिया गया था। इसके बाद नए कुलपति का चयन न हो पाने के कारण 13 जुलाई को संजय गांधी पीजीआइ के निदेशक प्रो. आरके धीमान को केजीएमयू के कुलपति का अतिरिक्त कार्य भार सौंपकर प्रो. भट्ट को कार्यमुक्त कर दिया गया था। संस्थान में एक पूर्णकालिक कुलपति की जरूरत थी और इसी के मद्देनजर राज्यपाल ने अनुभवी लेफ्टिनेंट जनरल डॉ विपिन पुरी को यह जिम्मेदारी मिली है।