आज ही के दिन भारत ने किया था पोकरण में परमाणु परीक्षण

प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम (पटना)

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर विशेष


नई दिल्ली: आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस है। देश में प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 11 मई को वर्ष 1998 में भारत द्वारा दूसरा परमाणु सफल परीक्षण पोखरण में किया था। आज का दिन भारत के वैज्ञानिक पराक्रम का दिवस है। आज भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्धियों और विफलताओं के आंकलन का दिन है ।

इसी क्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैधानिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से आज यानि 11 मई 2020 को राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक उच्‍च स्‍तरीय डिजिटल कॉन्‍फ्रेंस ‘रिबूटिंग द इकॉ‍नोमी थ्रू साइंड एंड टैक्‍नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन्‍स- रीस्टार्ट’ का आयोजन किया जा रहा है।  केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे।

इस कार्यक्रम के दौरान सदस्‍य विज्ञान, नीति आयोग डॉ. वीके सारस्वत, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार प्रो. के. विजयराघवन, डब्‍ल्‍यूएचओ में मुख्‍य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन; डीएसटी सचिव डॉ आशुतोष शर्मा और कुछ अन्‍य के विशेष संबोधन भी होंगे और इसमें और टीडीबी, डीएसटी और सीआईआई के अन्य अधिकारी भाग ले रहे हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव डॉ. रेणु स्‍वरूप, सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडेऔर भारत में इटली के राजदूत विन्सेन्ज़ो डी लुका विभिन्न सत्रों में विशेष भाषण देंगे।

नवयुग प्रोद्योगिकी का युग है। आधुनिक मनुष्य के जीवन की सभी भौतिक सुख – सुविधाओं का गहरा संबध प्रोद्योगिकी से है। विकास का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इससे अछूता हो। प्रत्येक देश की तरह हमारे देश में भी प्रद्योगिकी के सृजन, संरक्षण और संवर्द्धन के लिए संस्थान है। राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय इस उत्तरदायित्व को प्रखरता से निभाता है।

वर्ष 1998 में भारत ने राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न किया था। उस समय भारत के प्रधानमंत्री स्व० अटल बिहारी बाजपेयी थे। ये समस्त कार्य संपादन भारत के सुप्रसिद्ध भारत रत्न प्राप्त वैज्ञानिक स्व० एपीजे अब्दुल कलाम के देख-रेख में किया गया था। परमाणु परीक्षण सम्पन्न होने की तिथि 11 मई और 13 मई थी। 11 मई को पाँच सफल परीक्षण किया गया था। तब से राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस मनाया जाने लगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आपरेशन ‘शक्ति’ के बाद भारत को एक पूर्णकालिक नाभिकीय देश घोषित किया था। इसने भारत में नाभिकीय क्लब में शामिल होने वाले छठे देश का दर्जा दे दिया था। इसके साथ ही स्वदेश निर्मित एयरक्राफ्ट ‘हंस 3’ ने इसी दिन परीक्षण उड़ान भरी थी। इसके अलावा इसी दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश में नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों के उपलक्ष्य में वर्ष 1999 से प्रत्येक वर्ष 11 मई को इस दिवस का आयोजन करता है। प्रौद्योगिकी दिवस को वैज्ञानिक जांच, तकनीकी रचनात्मकता और विज्ञान, सोसाइटी और उद्योग के एकीकरण के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

टीडीबी इस दिन असाधारण वैज्ञानिक और तकनीकीय उपलब्धियों का पुरस्कार भी देता है। इस दिन प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा पुरस्कार स्वरूप 10 लाख रुपये और ट्राफी भी प्रदान की जाती है।

प्रत्त्येक वर्ष अलग-अलग थीम निर्धारित की जाती है।

  1. 2019 के लिए भी नई थीम रखी गयी थी- “साइंस फार पीपुल, पीपुल फार साइंस।” 
  2. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2018 की विषय “एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी” थी।
  3. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2017 की थीम “समावेशी और टिकाऊ विकास के लिए प्रौद्योगिकी” थी।
  4. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2016 की थीम ‘स्टार्टअप इंडिया के प्रौद्योगिकी समर्थक’ थी।
  5. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2014 की थीम ‘भारत के लिए समावेशी अभिनव’ थी।

इस दिन को अनेक सरकारी संस्थान, शैक्षिणिक संस्थान बड़े उत्साह से इस दिन को मनाते हैं। इस दिवस को मनाने का उद्येश्य देश में अब तक हुए कार्यों से अवगत कराना है।

भारतीय मंगलयान का पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह के कक्ष में पहुंच जाना 2014 की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है। हले प्रयास में सफल रहने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। अमरीका, रूस और यूरोपीय स्पेस एजेंसियों को कई प्रयासों के बाद मंगल ग्रह पहुंचने में सफलता मिली। चंद्रयान की सफलता के बाद ये वो कामयाबी थी जिसके मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की चर्चा होने लगी।

जीएसएलवी मार्क 2 के सफल प्रक्षेपण बहुत बड़ी कामयाबी थी क्योंकि उसमें भारत ने अपने ही देश में बनाया हुआ क्रायोजेनिक इंजन लगाया था। हाल हीं में भारत ने जल थल और नभ में सामरिक तौर पर सुरक्षित कर लिया यह सब प्रोद्योगिकी से हीं संभव हो पाया है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और 5 जी जैसै नवीनतम प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में भी भारत अपने प्रयास को गति देने की ओर है।