प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या भारत में सबसे कम : डॉ. माओ

- in स्तम्भ

लखनऊ: राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ एवं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ एनवायर्नमेंटल बॉटनिस्ट्स (आईएसईबी), लखनऊ द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस समारोह आयोजित किया गया जिसमे डॉ. अशिहो ए. माओ (निदेशक, भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण, पर्यावरण, वनएवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

सीएसआईआरराष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में विश्व पर्यावरण दिवस समारोह आयोजित

मुख्य अतिथि डॉ. अशिहो ए. माओने अपने व्याख्यान में हिमालय क्षेत्र में  750 मीटर से 6000 मीटरकी उचाई तक पाए जाने वाले रोडोडेंड्रन पौधे के बारे में जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि इस पौधे को हिमालय वन क्षेत्र में ऊचाई का सूचक माना जाता है. उत्तर पूर्व हिमालय क्षेत्र में भिन्न भिन्न रंगों केफूलों वाले रोडोडेंड्रन की कई प्रजातियाँ पायी जाती है. इस पौधे को सिक्किम प्रदेश द्वारा  द्वारा अभयारण्य स्थापित कर संरक्षित किया गया हैं. भारी मात्रा में उपलब्धता के कारण सिर्फ द्वारा इसका उपयोग पेय के रूप में भी किया जा रहा है. इसी सम्बन्ध में उन्होंने अपने द्वारा भ्रमण किये हुए हिमालयी क्षेत्रो के विहंगम दृश्यों को भी दर्शकों से साझा किये.

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन पर जानकारी देते हुए डॉ. माओ ने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ की संख्या सबसे कम हैं. वैश्विक स्तर पर तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए हमे यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रति व्यक्ति द्वारा मानसून सीजन में कम से कम 5 पौधा रोपित किया जाए जिससे भविष्य के पर्यावरण कोसुरक्षित किया जा सके. डॉ. माओ ने कहा कि भविष्य के सुरक्षित पर्यावरण हेतु प्राणवायु पौधों का वृक्षारोपण अतिआवश्यक  हैं. उन्होंने भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण द्वारा पौधरोपण हेतु चलाये जा रहे प्रयासों को भी बताया.

इसके पहले कार्यक्रम की शुरुआत में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ एनवायर्नमेंटल बॉटनिस्ट्स (आईएसईबी) के सचिव डॉ. आर डी त्रिपाठी ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया कि एनबीआरआई विगत दो दशकों से पर्यावरण सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन पर शोध कार्य कर रहा है. एनबीआरआई द्वारा जल एवं वायु प्रदूषण को कम करने वाले कई पौधे खोजे जा चुके है जिनका उपयोग वर्तमान में नदियों और वायु को शुद्ध करने में किया जा रहा है. संस्थान के निदेशक प्रो. एस के बारिक ने  अपने स्वागत संबोधन में इस वर्ष की थीम “वायु प्रदूषण” के बारे में चर्चा करते हुएबताया कि वैश्विक स्तर पर वायु प्रदुषण खतरनाक स्थिति पर पहुच चुका हैं जिसका हम सब को मिल कर सामना करने की जरुरत है.