सुहागन स्त्रियां मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं?, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

सुहागन स्त्रियां मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं?, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

हिंदू धर्म में स्त्रियों का मांग में सिंदूर सजाना सुहागिन होने का और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है मांग में इसको भरने से पति की आयु बढ़ती है और स्त्री के सौभाग्य में वृद्धि होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है मांग में इसको लगाने का प्रचलन कहां से आया और इसका धार्मिक या वैज्ञानिक कारण क्या है।

धार्मिक मान्यता

मान्यताओं के अनुसार, यदि पत्नी के बीच मांग सिंदूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यु नहीं हो सकती है। सिंदूर उसके पति को संकट से बचाता है। हिंदू धर्म में नवरात्र और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारके दौरान पति के द्वार अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाना काफी शुभ माना जाता है। पती-पत्नी के बीच हमेशा मजूबत संबंध बना रहता है।

विवाहित महिलाओं द्वारा सिंदूर लगाने का एक कारण यह है कि इससे सुहागन स्त्री के सौन्दर्य में वृद्धि होती है। पौराणिक कथाओं में सिंदूर के लाल रंग के माध्यम से माता सती और पार्वती की ऊर्जा को व्यक्त किया गया है। बताया जाता है इसको लगाने से माता पार्वती अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देती हैं।

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वैज्ञानिक महत्व

सिंदूर में पारा जैसी धातु की अधिकता होती है, जिससे चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़तीं यानी इसको लगाने से महिलाओं के चेहरे पर बढ़ती उम्र के संकेत जल्दी नज़र नहीं आते और उनका चेहरा ख़ूबसूरत नज़र आता है। इसके साथ ही सिंदूर लगाने से स्त्री के शरीर में स्थित वैद्युतिक उत्तेजना नियंत्रित रहती है।

आपको बता दें कि माता लक्ष्मी के सम्मान का प्रतीक भी सिंदूर माना जाता है और माता को सिंदूर बहुत प्रिय है। माता लक्ष्मी की पूजा में इसका ही प्रयोग किया जाता है। ऐसा पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि माता लक्ष्मी पृथ्वी पर पांच स्थानों पर रहती हैं। जिसमें पहला स्थान स्त्री का सिर है, जहां पर वह सिंदूर लगाती हैं। इससे घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए महिलाओं को देवी माना गया है और उनका अपमान ना करने के लिए कहा जाता है।

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