चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरने से किसानों को उचित समय पर मिल सकेगा गन्ने का मूल्य 

- in उत्तर प्रदेश

लखनऊ: वैज्ञानिकों से लागत प्रभावी तथा किसान केन्द्रित उन्नत गन्ना प्रौद्योगिकी के विकास किया जाये जिससे गन्ना उत्पादन की लागत घटाकर किसाओं की आय बढ़ाई जा सके. ये बात मुख्य अतिथि संजय भूसरेड्डी (प्रमुख सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विभाग तथा गन्ना एवं चीनी आयुक्त, यूपी सरकार) ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में “गन्ना किसानों की आय को दोगुना करने हेतु समस्याएँ व भावी रणनीति” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही. उन्होने चीनी मिलों को भी अपने उत्पाद के विविधीकरण करने के लिए आसवनी सुविधायुक्त चीनी मिलों से इथेनॉल व पौटेबिल इथेनॉल बनाने के साथ, इसके बौटलिंग प्लांट लगाने पर भी ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरने से किसानों को भी गन्ने का मूल्य उचित समय पर मिल सकेगा.

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में गन्ना किसानों की आय दोगुनी करने पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

उन्होंने इस अवसर पर स्मारिका का भी विमोचन किया. श्रीमती शुभा ठाकुर (संयुक्त सचिव (फसलें/तिलहन), कृषि, सहकारिता तथा किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार) ने गन्ना किसानों की आय में वृद्धि करने हेतु गन्ना उत्पादन लागत में कमी करने, किसानों को समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने एवं गन्ने के मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास पर बल दिया.  डॉ. आरके सिंह( सहायक महानिदेशक (व्यावसायिक फसलें), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) ने ब्राज़ील की तर्ज पर आवश्यकतानुसार चीनी एवं इथेनॉल का उत्पादन की आवश्यकता पर बल दिया. डॉ. सिंह ने जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए जलवायु सहनशील क़िस्मों तथा गन्ने के लिए हार्वेस्टर के विकास तथा सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने पर बल दिया.

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अश्विनी दत्त पाठक ने गन्ना किसानों की आय को दोगुना करने हेतु संस्थान द्वारा डीएससीएल शुगर के साथ पीपीपी मोड में किए गए समझौते की चर्चा की जिसके अंतर्गत अंगीकृत किए गए आठ गावों से बहुत ही सार्थक परिणाम आने आरंभ हो चुके हैं. डॉ.एके साह( प्रधान वैज्ञानिक एवं राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन सचिव) ने गन्ना खेती में किसानों को आ रही विभिन्न समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिकों से उनके समुचित निदान शीघ्र खोजने के लिए निवेदन किया. गन्ना विकास निदेशालय के निदेशक डॉ. मान सिंह ने मंत्रालय द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया.

आर.एल.टमक( कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी-चीनी, डीसीएम श्रीराम शुगर लिमिटेड) ने गन्ने की जादुई प्रजाति को 0238 को लाल सड़न रोग से मुक्त रखने, प्रदेश के भिन्न-भिन्न भागों में गन्ने की औसत उत्पादकता के स्तर को बराबर लाने, परिपक्वता आधारित गन्ने की कटाई, पर्ची प्रणाली को समाप्त करने तथा चीनी मिलों को कृषि प्रसंस्करण हब के रूप में विकसित करने, ड्रिप/माइक्रो सिंचाई को बढ़ावा देने व गन्ने की कटाई का यंत्रीकरण करने हेतु कार्य योजना बनाने पर ज़ोर दिया. कार्यक्रम का समापन डॉ. एके साह के धन्यवाद प्रस्ताव से हुआ. कार्यशाला में देश के 15 गन्ना उत्पादक राज्यों से आए 200 से अधिक वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं,   प्रशासनिक अधिकारियों, चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों, विकास कार्यकर्ताओं तथा किसानों ने सहभागिता की. इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें गन्ने की नवीनतम विकसित क़िस्मों, उत्पादन प्रौध्योगिकी तथा गन्ना खेती में प्रयुक्त होने वाले कृषि यंत्रों को प्रदर्शित किया गया.