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आज भी शोषित है रायबरेली : अजय अग्रवाल

raibarleeरायबरेली। सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली को कागजों में तो वीवीआईपी जिले का दर्जा हासिल है  जबकि हकीकत इसके एकदम विपरीत है। यहां केवल घोषणाएं हुई हैं और लोगों को भावात्मक एवं मानसिक रूप से शोषित किया गया है। यह दावा भाजपा प्रत्याशी अजय अग्रवाल ने किया है। रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अजय अग्रवाल ने कहा  ‘‘मुझे बहुत आश्चर्य है कि मैं जिस जिले से चुनाव लड़ रहा हूं उसकी सर्वेसर्वा देश की ‘सुपर प्रधानमंत्री’ होने के साथ-साथ देश ही नहीं विश्व की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शुमार की जाती हैं। हकीकत में उन्होंने अपनी शक्ति देश व क्षेत्र के विकास के लिए प्रयास नहीं किया बल्कि इसको कमजोर बनाने  देश को लूटने एवं लोगों को गरीब बनाए रखने में लगाई है।’’ उन्होंने बताया कि मानव विकास की दृष्टि से प्रदेश के 7० जिलों में रायबरेली 55वें नबंर पर है तो मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के लिहाज से जिला 67वें नंबर पर है। यहां की सांसद अपनी सांसद निधि का 66 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई हैं। और तो और  शायद बमुश्किल 8-1० बार शहर में कदम रखा है। अपने कार्यकाल में और संसद में एक प्रश्न भी नहीं उठाया  न तो देश के बारे में और न ही रायबरेली के बारे में। उन्होंने बताया कि यहां पर लगभग 7० प्रतिशत लोग कुपोषण का शिकार हंै जो कि उड़ीसा  झारखंड से भी ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह जिला उत्तर प्रदेश के 1० सबसे गरीब जिलों की श्रेणी में आता है। यहां के गांवोें में 58 प्रतिशत से ज्यादा लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं। रेल कोच फैक्ट्री के बारे में बोलते हुए  भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि विकास के नाम रेल कोच फैक्ट्री की हकीकत सबके सामने है। 15०० गरीब परिवारों की जमीन लेने के साथ उनको वादा किया गया था कि उनको नौकरी मिलेगी  लेकिन 15० परिवारों को नौकरी मिली वो भी रेलवे में इधर-उधर शहरों में  उसमें भी एक ग्रेजुएट लड़का रेलवे टै्रक साफ करने का काम करता है। मीडिया की खबरों में आने के लिए बने-बनाये 2० कोचों को यहां लाकर उन्हें रंग-रोगन कर खबरों में छपने की अति निम्नस्तीय हरकत की गई। पिछले 1० सालों में यहां की लगभग 2312 में से 1००० यानी 4० प्रतिशत से ज्यादा लघु एवं मध्यम ईकाईयां बंद हो गई। 12 में से 6 बड़े उद्योगों पर भी ताला लग चुका हैं। रोजगार तो मिला नहीं जबकि 1० ००० से ज्यादा लोग पिछले कुछ सालों में बरोजगार हो गए। उन्होंने कहा कि अगर हम संपूर्ण विकास दृष्टि पर मापें तो रायबरेली क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार 638 जिलों में 391 नंबर पर आता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई वीवीआईपी जिला इतना पिछड़ा हो सकता है। अब यहां की जनता के सामने सोनिया गांधी के विकास का काला चिळा है  उनको अब यह समझना है कि उनको कोरे वायदे चाहिए या फिर वास्तविक विकास।

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