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आनंदीबेन पटेल : कभी थीं शिक्षिका अब मुख्यमंत्री

23 anandi benअहमदाबाद । आज से करीब 25 साल पहले एक पिकनिक के दौरान दो स्कूली छात्राएं नर्मदा नदी में गिर गईं और डूबने लगीं। उस वक्त 47 वर्षीया शिक्षिका आनंदीबेन पटेल ने उफनती नदी में छलांग लगाकर डूबती दोनों छात्राओं को जिंदा बाहर ले आईं। उन्हें राज्य सरकार की ओर से वीरता पुरस्कार से नवाजा गया और यहीं से उनकी राजनीति में प्रवेश हुआ। अब वह मुख्यमंत्री बन गई हैं। गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी आनंदीबेन पटेल 73 वर्ष की हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ दे चुके नरेंद्र मोदी आनंदी से 11 साल छोटे हैं लेकिन दोनों ने ही मेहसाना जिले के विसनगर स्थित एन.एम. हाईस्कूल से शिक्षा प्राप्त की। हाईस्कूल में 7०० लड़कों के बीच आनंदी अकेली छात्रा थीं और अच्छी एथलीट मानी जाती थीं। दो बच्चों की मां आनंदीबेन आज भी नियमित रूप से प्राणायाम और योग करती हैं। उनका शुरुआती जीवन अहमदाबाद में एम.के. विद्यालय में अध्यापन करते गुजरा। अध्यापन के प्रति उनके लगाव को इसी बात से समझा जा सकता है कि शिक्षिका रहने के दौरान उन्होंने कई प्रोन्नतियों को छोड़ दिया। उनका मानना था कि प्रशासनिक जवाबदेही आने पर वह अध्यापन पर ध्यान नहीं दे सकेंगी। इस दौरान उन्होंने विधवाओं और गरीब महिलाओं को शिक्षित करने पर जोर दिया और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित किया। उन्हें गुजराती शाकाहारी भोजन और सूती साड़ी काफी पसंद है। जिस दौरान उन्हें नर्मदा नदी से दो छात्रों को बचाने के लिए वीरता पुरस्कार से नवाजा गया उनके पति मफतभाई पटेल भाजपा के प्रमुख नेताओं में शुमार थे। नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला के साथ उनकी करीबी थी।
उसी दौरान मोदी और वाघेला ने आनंदीबेन को पार्टी से जुड़ने का न्योता दिया और उन्हें महिलाओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी दी। वह भाजपा में शामिल हो गईं और प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनाई गईं। पार्टी में उस दौरान कोई प्रमुख महिला नेता नहीं थी। आनंदीबेन निडर और मजबूत नेता की छवि के साथ उभरीं। वर्ष 1994 में वह गुजरात से राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं और 1998 में विधानसभा चुनाव जीतकर वह केशुभाई पटेल की सरकार में शिक्षा मंत्री बनीं। वर्ष 2००1 में केशुभाई पद से हटे और मोदी ने सरकार बनाई। कुछ दिनों बाद आनंदीबेन शहरी एवं राजस्व मंत्री बनीं। साथ ही वह राज्य सरकार की कई समितियों की अध्यक्ष भी रहीं। इस दौरान वह हमेशा मोदी के साथ खड़ी रहीं। आनंदीबेन मोदी के लिए प्रशासनिक काम करने वाली सबसे कुशल मंत्री मानी जाती रही हैं।

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