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‘आप’ के लिए सख्त फैसले लेने का दिन

aapनई दिल्ली : दिल्ली में सबसे बड़ी जीत के साथ ही आम आदमी पार्टी (आप) अपनी सबसे बड़ी टूट की ओर बढ़ रही है। बुधवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी के दो सबसे बड़े आधार स्तंभ रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की पार्टी की शीर्ष इकाई से विदाई हो सकती है। इस बड़ी बैठक से एक दिन पहले केजरीवाल खेमे ने प्रशांत भूषण के परिवार पर भी आरोप लगाने शुरू कर दिए। इस बैठक में पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल गैर हाजिर रह सकते हैं। गुरुवार को वह प्राकृतिक चिकित्सा इलाज के लिए दस दिन की छुट्टी पर बंगलुरु जा रहे हैं। मंगलवार शाम तक आप के संस्थापक सदस्य शांति भूषण ने मामले को शांत कराने के उद्देश्य से बयान दिया कि अरविंद केजरीवाल को पार्टी का संयोजक बने रहना चाहिए और प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहना चाहिए। प्रशांत व योगेंद्र को केजरीवाल का समर्थन करना चाहिए। बावजूद इस नसीहत के टीम केजरीवाल समझौते की टेबल पर आने को तैयार नहीं है। शांति भूषण ने कहा कि पार्टी में झगड़ा सही नहीं। शांति भूषण का बयान उस वक्त आया है, जब आप नेता उन पर हमले कर रहे थे। इस मामले में अपनी चुप्पी पहली बार तोड़ते हुए केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘पार्टी में जो चल रहा है, उससे मैं बेहद आहत और दुखी हूं। दिल्ली के लोगों ने हममें जो विश्वास जताया है, यह उससे धोखा देना है। मैं इस गंदी लड़ाई में घसीटे जाने से इन्कार करता हूं। सिर्फ दिल्ली के प्रशासन पर ध्यान दूंगा। जनता के भरोसे को किसी हालत में टूटने नहीं दूंगा।’
वहीं, खुद को पार्टी की शीर्ष इकाई से निकाले जाने की तैयारी के बीच प्रशांत भूषण ने कहा कि पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल उनसे समझौते को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने ही इनकार कर दिया है। इसे वैचारिक मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने जो मुद्दे उठाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं और उन सिद्धांतों से जुड़े हैं जिनके आधार पर पार्टी की स्थापना हुई थी।’ उन्होंने यहां तक कहा कि इस बात के कई प्रमाण हैं कि पार्टी में पारदर्शिता घट रही है। साथ ही हाई कमान संस्कृति पनपने का खतरा पैदा हो गया है। चंदा देने वाली कंपनियों की जांच के मामले में तो पार्टी पूरी तरह नाकाम रही ही है। साथ ही पार्टी के खर्च को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। दिल्ली प्रदेश संयोजक आशुतोष ने शांति भूषण पर परिवारवाद का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण, उनकी बहन शालिनी व उनके पिता शांति भूषण भी पार्टी में हैं, जो नियम के अनुसार गलत है। इससे पहले सुबह आशीष खेतान ने ट्वीट किया कि शांति भूषण, प्रशांत और शालिनी यानी पिता, बेटे और बेटी की ये तिकड़ी पार्टी के सभी धड़ों पर अपनी पकड़ बनाना चाहती है। चाहे वह राजनीतिक मामलों की कमेटी हो या राष्ट्रीय कार्यकारिणी।

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