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आप के वीडियो से पुलिस बेनकाब, 3 निलंबित

 

aapनई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी किया जिससे पुलिस का असली चेहरा सामने आ गया। वीडियो देखने के बाद तीन पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए। वीडियो में पुलिसकर्मियों को एक व्यक्ति को पीटते और उसका बटुआ खींचते दिखाया गया है। इस वीडियो के आधार पर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के खिलाफ केजरीवाल के नेतृत्व में दो दिन चले धरने के चंद ही दिनों बाद यह वाकया सामने आया है। आप ने इस संदेश के साथ वीडियो को ऑनलाइन किया कि कैमरे में कैद इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कार्रवाई करेंगे? पार्टी ने कहा कि एक जागरूक नागरिक (मध्य प्रदेश के धर्मेंद्र कुमार) ने 12 जनवरी को दिल्ली के लालकिला के समीप पुलिसकर्मियों की इस कारिस्तानी को कैमरे में कैद किया था। वीडियो फुटेज में वर्दीधारी दो पुलिसकर्मी एक व्यक्ति को डंडे से पीटते जेब से उसका बटुआ खींचते और पैसे निकालते दिखाई दे रहे हैं। धर्मेंद्र कुमार ने वीडियो फुटेज को यू-ट्यूब पर पर अपलोड किया। वेबसाइट पर फुटेज देख आप पार्टी के सदस्यों ने इसे उठा लिया और ऑनलाइन साझा किया। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने आईएएनएस को बताया ‘‘इस वीडियो को अपलोड किए जाने के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।’’ निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम हैं-जितेंद्र अरविंद ओर सौरभ। ये तीनों लालकिला कोतवाली में बतौर कांस्टेबल तैनात थे। आप ने अपने संदेश में कहा है ‘‘दिल्ली पुलिस बर्बरता के लिए जानी जाती है। हम आए दिन दिल्ली पुलिस की बर्बरता के किस्से सुनते हैं। यहां पेश है ऐसा ही एक वीडियो। यह वीडियो न केवल दिल्ली पुलिस के अमानवीय व्यवहार को साफतौर पर दिखा रहा है बल्कि शहर में पुलिस के जवान किस तरह जबरन वसूली करते हैं इसका नमूना भी कैमरे में कैद है।’’ इसी हफ्ते दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जब दिल्ली सरकार के मंत्रियों के आदेश पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था तब इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर केजरीवाल ने 33 घंटों का धरना दिया था। उनके समर्थन में जुटी भारी भीड़ के कारण मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था चरमरा गई थी। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते अपराध के लिए पुलिस बल को जिम्मेदार ठहराया था और पुलिस तंत्र को सुधारने के लिए उसका नियंत्रण केंद्र सरकार के बजाय दिल्ली सरकार को हस्तांतरित करने की मांग की थी जो मानी नहीं गई।

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