‘आरएसएस’ को बदनाम करने का षडयंत्र

बृजनन्दन राजू

स्तम्भ : जिस संगठन की स्थापना देश को आजादी दिलाने के लिए हुई थी। आजादी मिलने के बाद इस राष्ट्र को सजाने संवारने और इस राष्ट्र के निवासियों को संगठित करने के उद्देश्य से जो संगठन काम कर रहा है उसको बदनाम करने का षड़यंत्र कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व कर रहे हैं। जिस संगठन के हजारों प्रचारक व्यक्तिगत इच्छाओं को तिलांजलि देकर घर परिवार छोड़कर राष्ट्र कार्य के निमित्त समाज में समता सद्भाव लाने के लिए काम करते हैं उस संगठन को संकीर्ण विचारों में नहीं बांधा जा सकता। 1925 से अपनी ध्येय यात्रा शुरू कर संघ आज विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। परन्तु इस कालखंड में काफी उतार चढ़ाव से संघ को गुजरना पड़ा है। समाज के सभी वर्गों से व्यक्तिगत संपर्क की अपनी अनोखी कार्यपद्धति के कारण संघ ने बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना अत्यंत सरल और शांतिपूर्ण ढंग से किया है। आजादी के समय, आपातकाल के समय संघर्ष, श्रीराम जन्मभूमि का आन्दोलन या वंचित वर्ग के लिए समाजसेवा के हजारों प्रकल्प खड़े करने की योजना, ऐसे विविध विषयों पर कार्य करते समय भी संघ का एकमेव लक्ष्य भारत को परमवैभव के शिखर पर पहुंचाना रहा है। संघ प्रसिद्धि परांगमुख संगठन है। संघ या उसके कार्यकर्ता मान सम्मान यश प्रतिष्ठा से कार्य नहीं करते। उनकी अखण्ड मौन साधना अनवरत चलती रहती है। कई बार संघ को उलझाने के प्रयास हुए होंगे लेकिन संघ अपने उद्देश्य से भटका नहीं। दुनिया में कोई भी ऐसा संगठन नहीं है जिसके कार्यकर्ता प्रतिदिन एकत्र आते हों । संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन शाखा पर एकत्र होकर संघ समाज की चिंता ही नहीं करते अपितु समाज की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। आज देशभर में संघ के पौने दो लाख से अधिक सेवाकार्य बगैर सरकार की सहायता से चल रहे हैं। इन सेवाकार्यों से समाज के सभी वर्गों के लोग लाभान्वित होते हैं। संघ जातिभेद मानता नहीं है सबके लिए कार्य करता है।
ऐसा संगठन जो राष्ट्र की एकता अखण्डता को अक्षुण रखने का हर संभव प्रयास करता है। ऐसे संगठन के बारे में गलत धारणाएं फैलायी जा रही हैं। वैसे संघ को बदनाम करने का प्रयास पहली बार नहीं हो रहा है। जिनको इस राष्ट्र की कीर्ति नहीं सुहाती है। सत्ता प्राप्ति जिनका ध्येय है। राष्ट्र के नागरिकों को गुमराह कर समाज की एकता अखण्डता को तार—तार करना जिनका उद्देश्य हो गया है। वह समय —समय पर देश को आग में झोंकने का प्रयास करते रहते हैं। वह कभी माबलिंचिंग के नाम पर कभी,कभी हिन्दू मुस्लिम के नाम पर, कभी सीएए और एनआरसी के नाम पर, कभी जेएनयू में हिंसा करवाकर और अब संघ के फर्जी संविधान के नाम पर लोगों में दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हर बार वह बेनकाब होते हैं लेकिन अपनी हरकतों से वह बाज नहीं आते हैं। असामाजिक तत्वों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नाम से 16 पृष्ठ की एक छोटी पुस्तिका प्रकाशित कर प्रचारित किया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है। संघ की ओर से ऐसी कोई पुस्तिका प्रकाशित हीं नहीं की गई है। असामाजिक तत्वों तथा संघ विरोधियों द्वारा सोशल मीडिया व ईमेल के माध्यम से पुस्तिका को प्रसारित किया जा रहा है। पुस्तिका में इस प्रकार के तथ्य प्रकाशित किए गए हैं, जिनका संघ से कोई संबंध नहीं है। कोई भी पुस्तिका प्रकाशित की जाती है तो नियमानुसार उस पर प्रकाशक, प्रकाशन संस्था का नाम, आईएसबीएन क्रमांक अथवा पंजीकरण क्रमांक प्रकाशित करना आवश्यक है। लेकिन प्रचारित की जा रही पुस्तिका में ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इससे समझ में आता है कि पुस्तिका को प्रचारित करने का एकमात्र उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना, समाज में विघटन उत्पन्न करना, विशेष वर्ग के लोगों को अन्य के प्रति भड़काना है। साजिशकर्ताओं ने पुस्तिका को अधिक प्रचारित करने के उद्देश्य से पुस्तिका को लेकर अपने सुझाव प्रधानमंत्री कार्यालय और नागपुर कार्यालय भेजने को कहा है इतना ही नहीं, उत्कृष्ट सुझाव देने वाले को 10 हजार रुपए के पुरस्कार का लालच भी दिया गया है। संघ की ओर इसका खण्डन भी किया गया कि संघ या सरसंघचालक की ओर से ऐसी कोई पुस्तिका प्रकाशित नहीं की गई है। इसके खिलाफ लखनऊ में दो और मेरठ में एक एफआईआर दर्ज की गयी है। संविधान को लेकर संघ की स्पष्ट मान्यता है, वह ऐसा कोई भी काम नहीं करता जिससे संविधान पर आंच आये। संघ की भारतीय संविधान में पूर्ण आस्था है। भारतीय संविधान को ठुकराकर एकाधिकार लाएं यह बात संघ कभी नहीं कह सकता है। जो शक्तियां भ्रम फैला रही हैं वह जरूर यह करती हैं और करने का प्रयास करती हैं। कम्युनिस्ट पार्टियां जो यह मानती हैं कि सत्ता हमेशा बंदूक की नली से निकलती है। वह सत्ता प्राप्ति के लिए हर उपक्रम करती हैं। जब वह सत्ता में होती हैं तो उनका संविधान अलग चलता है। केरल व पश्चिम बंगाल इसका ताजा उदाहरण है।
महात्मा गांधी की हत्या के झूठे आरोप भी संघ झेल चुका है। जांच के बाद संघ निर्दोष सिद्ध हुआ आज जब दुनिया के राष्ट्र प्रगति कर रहे हैं और हमें भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत है तो हम आन्तरिक विषयों में कब तक उलझे रहेंगे। नागरिकता संशोधन कानून जो वर्तमान की केन्द्र सरकार लेकर आयी जिसके तहत पाकिस्तान,अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है जिसके द्वारा हम पूरे विश्व में पाक को नीचा दिखाा सकते थे। ऐसा महत्वपूर्ण अवसर हमने खो दिया । जिस कानून से भारत में रह रहे नागरिकों से कोई संबंध नहीं है इसके बारे में विपक्षी पार्टियों ने भ्रम फैलाया। वामपंथियों ने जेएनयू में हिंसा कराई। पुलिस की जांच में यह बात सिद्ध हो चुकी है। अनुच्छेद 370, राम मंदिर, सबकुछ शांति से निपट जाने पर विपक्षीपार्टियों को भी इस तरह का निष्कंटक मोदी राज पसंद नहीं आ रहा। मोदी जैसा स्पष्टवादी नेता अब तक विरोधियों ने देखा नहीं था। मोदी विरोध से काम न बनता देख उनके निशाने पर अब आरएसएस है। मोहन भागवत ने अभी हाल ही में हैदराबाद के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि संघ का ध्येय संपूर्ण समाज को संगठित करना है। उन्होंने कहा कि संघ की दृष्टि में 130 करोड़ का पूरा समाज हिन्दू समाज है। यह बात संघ आज नहीं कह रहा है। संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने भी कहा था कि हिन्दू समाज को बलशाली और संगठित करने के लिए ही संघ ने जन्म लिया है। यही संघ का मूल मंत्र है। संघ सभी वर्गों को समरसता के सूत्र में बांधने वाला संगठन है। सब हिन्दुओं के साथ एक जैसा व्यवहार और समग्र हिन्दू समाज की रक्षा करना जिनका ध्यये है। हिन्दुव: सोदरा सर्वे न हिन्दू पतितो भवेत,मम दीक्षा हिन्दू रक्षा मम मन्त्र समानता जो नित्य स्मरण करता हो उसके बारे में गलत बातें प्रचारित करना निन्दनीय है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर जानने समझने की जरूरत है।
वैसे मकर संक्रान्ति बीत चुकी है। सर्वत्र परिवर्तन दिख रहा है। शीघ्र ही समाज से नकारात्मकता दूर होगी। सर्वे भवन्तु सुखिन: जो भारत का पुरातन मूल्य है। इस भारतीय चिंतन को प्रबल बनाने का एकमेव यशस्वी साधन संघकार्य ही है। संघ समाज में ऊंचनीय एवं छुआछूत को समाप्त कर समरसता एवं स्वाभिमान का भाव जगाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो रहा है। हिन्दू धर्म हिन्दू संस्कृति तथा हिन्दू समाज का संरक्षण संवर्धन करने की सामार्थ्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ही है।
(लेखक प्रेरणा शोध संस्थान नोएडा से जुड़े हैं)