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ईश्वर ही सत्य है

godस्वामी रामकृष्ण परम हंस जाने-माने संत थे। उनके शिष्य विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। स्वामी जी कहते थे।
ईश्वर ही सत्य है। शेष सब अनित्य जीव जगत, घर, द्वार, लड़के, बच्चे, यह सब बाजीगर का इंद्रजाल है। बाजीगर डंडे से ढोल पीटता है और कहता है- देख तमाशा मेरा-तू देख तमाशा मेरा। बस, ढक्कन खोला नहीं कि कुछ पक्षी उसमें से निकल कर आकाश में उड़ गये, परन्तु बाजीगर ही सत्य है और सब अनित्य। अभी है, थोड़ी देर में गायब।
कैलाश पर शिव बैठे थे। पास ही नंदी थे। उसी समय एक जोर से ध्वनि हुई, नंदी ने पूछा-भगवान यह कैसी आवाज है। शिव ने कहा- रावण पैदा हुआ है। यह उसकी की आवाज है। कुछ देर बाद फिर ध्वनि हुई। नंदी ने फिर पूछा- शिव ने हंसकर कहा-यह रावण मारा गया। जन्म और मृत्यु, यह सब इंद्रजाल सा है। अभी है, अभी गायब। ईश्वर ही सत्य है और सब अनित्य। पानी ही सत्य है। बुलबुले अभी हैं, अभी नहीं। बुलबुले पानी में ही मिल जाते हैं। जिस जल से उनकी उत्पŸिा होती है, उसी में अंत में लीन हो जाते हैं। ईश्वर महासमुद्र है, जीव बुलबुले। ईश्वर ही सत्य है, उसे पाने का यत्न करो।
वास्तव में संसार में जो दिखता है वह ईश्वर की माया है, इसलिए जीव को चाहिए कि वह माया के आवरण ढकी अपनी आत्मा को प्रकाशित कर ब्रह्म का साक्षात्कार करे।

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