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केंद्र सरकार से चुनाव आयोग नाराज, कहा- हमसे पूछे बिना फैसले न करें

पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने पिछले दिनों कुछ केंद्रीय मंत्रालयों की ओर से किए गए फैसलों से पहले अनुमति नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताई है। आयोग ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि आदर्श आचार संहिता पर उसके दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन हो। 
 
सूत्रों की मानें तो आयोग ने वित्त मंत्रालय द्वारा बगैर इजाजत केंद्रीय बजट की तारीख एक फरवरी तय करने के बाद यह कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की बात स्पष्ट होने के बावजूद सरकार ने बजट की तारीख कर दी। 

आयोग ने कैबिनेट सचिव सिन्हा को लिखे पत्र में कहा है कि मंत्रालयों ने आयोग की अनुमति के बगैर कुछ ऐसे फैसले किए जिससे पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के दौरान सभी पार्टियों को मिलने वाला समान अवसर प्रभावित हो सकता है। आयोग ने खासतौर पर वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और रक्षा मंत्रालय का जिक्र करते हुए कहा है कि उन्होंने आचार संहिता लागू होने के दौरान अहम मामलों को आयोग के पास नहीं भेजा। गौरतलब है कि आचार संहिता 4 जनवरी को ही लागू हो गई थी और यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा व मणिपुर में विधानसभा चुनाव खत्म होने तक प्रभावी रहेगी। 

वित्त मंत्रालय का फैसला मुुख्य वजह

आयोग के सूत्रों ने बताया कि 27 जनवरी को सरकार को भेजे गए संदेश की मुख्य वजह वित्त मंत्रालय का वह फैसला था, जिसमें उसने मंजूरी लिए बगैर ही बजट की तारीख तय कर दी, जबकि यह स्पष्ट था कि नई तारीख के मुताबिक केंद्रीय बजट उस वक्त पेश होगा जब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, पंजाब और गोवा में चुनाव प्रक्रिया चल रही होगी। 

आयोग ने चुनाव वाले पांचों राज्यों में बगैर अनुमति लिए विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करने के लिए 20 जनवरी को नीति आयोग की भी खिंचाई की थी और कहा था कि ऐसे कार्यक्रम चुनाव खत्म होने के बाद ही आयोजित किए जाने चाहिए। उसी दिन आयोग ने रक्षा मंत्रालय को उत्तराखंड में संयुक्त कमांडर सम्मेलन के आयोजन की अनुमति दी थी। हालांकि, आयोग ने मंत्रालय को इस शर्त के साथ अनुमति दी थी कि सम्मेलन का उद्घाटन करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम को राज्य में होने वाली रैली से नहीं जोड़ेंगे। कांग्रेस ने आयोग से शिकायत की थी कि भाजपा इस कार्यक्रम का इस्तेमाल पूर्व एवं सेवारत सैनिकों को प्रभावित करने के लिए कर सकती है ताकि पांच राज्यों में होने जा रहे चुनावों में इसका फायदा उठाया जा सके। 

 
 
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