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गायत्री प्रजापति व छह साथियों ने ही किया गैंगरेप, हो सकती है 10 साल की सजा

महिला से गैंगरेप में फंसे पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके छह साथियों पर पीड़िता की नाबालिग बेटी से भी गैंगरेप का केस चलेगा। चित्रकूट की महिला व उसकी नाबालिग बेटी से गैंगरेप मामले में एसआईटी ने शुक्रवार को चार्जशीट पेश की।
गायत्री प्रजापति व छह साथियों ने ही किया गैंगरेप, हो सकती है 10 साल की सजा
611 पन्ने की चार्जशीट में गायत्री व उसके साथियों पर सभी आरोप सही पाए गए। एसआईटी प्रभारी सीओ चौक राधेश्याम राय ने बताया कि सभी सातों आरोपियों पर अश्लील हरकतों और स्त्री की लज्जा का अनादर करने की दो धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की नई रूलिंग के मुताबिक पीड़िता की बेटी से रेप के प्रयास को भी गैंगरेप माना गया है।

एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि एफआईआर में पीड़िता की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगा था, लेकिन निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट की नई रूलिंग के मुताबिक इसे भी गैंगरेप की धारा में बदल दिया गया। यानी गायत्री और उसके छह गुर्गों ने पीड़िता के अलावा उसकी नाबालिग बेटी से भी गैंगरेप किया।

इन धाराओं के आधार पर चलेगा केस

गायत्री और उसके गुर्गों पर पीड़िता ने नाबालिग बेटी से घिनौनी हरकतों का आरोप लगाया था। इस आधार पर एफआईआर में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज़ (पॉक्सो) एक्ट 2012 की 4/5 धारा शामिल की गई थी।यह धारा नाबालिग से छेड़छाड़ की है और दोषसिद्ध साबित होने में सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

विवेचना के बाद एसआईटी ने चार्जशीट में पॉक्सो एक्ट की 5/6 धारा लगाई है, जो नाबालिग से दुष्कर्म की है। इस धारा में दोषसिद्ध साबित होने पर दस साल तक की सजा है।

पीड़िता सिर्फ एक तारीख बता सकी… वही चार्जशीट का आधार बनी

पीड़ित महिला ने गायत्री पर तीन साल के दौरान कई बार गैंगरेप का आरोप लगाया, लेकिन स्पष्ट रूप से सिर्फ एक तारीख बता सकी। यह तारीख थी 2016 को गायत्री के जन्मदिन की।

पीड़िता ने एसआईटी को दिए बयान में बताया है कि गायत्री के बर्थडे पर नाबालिग बेटी के साथ वह भी उसके गौतमपल्ली स्थित सरकारी आवास पर आयोजित पार्टी में गई थी।

पार्टी के बाद मां-बेटी को घर पर ही रोक लिया गया। अगले दिन गायत्री ने उसके साथ रेप किया और बेटी से रेप की कोशिश की। पुलिस के पास पीड़िता की तरफ से बताई गई रेप की सिर्फ यही एक तारीख है जो चार्जशीट का आधार बनी।

विवेचकों पर लगे गायत्री को बचाने के आरोप

गायत्री का रसूख इतना था कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तभी दर्ज की जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया।यही नहीं, विवेचक सीओ आलमबाग अमिता सिंह पर गायत्री को बचाने के आरोप लगे। तब विवेचना सीओ हजरतगंज अवनीश कुमार मिश्रा को सौंपी गई थी।

अवनीश पर अंगुली उठी तो सीओ चौक राधेश्याम राय के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई और विवेचना सौंप दी गई।

ये हैं सात आरोपी
पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, अमेठी के लेखपाल अशोक तिवारी, गायत्री के निजी सचिव रूपेश्वर उर्फ रूपेश, गीतापल्ली इको गार्डन के पास रहने वाले बिजनेस पार्टनर विकास वर्मा, गोमतीनगर के विकासखंड निवासी अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, कानपुर के नौबस्ता के आशीष कुमार शुक्ला और मूलरूप से उरई व यहां मड़ियांव थाना क्षेत्र के जानकीपुरम सेक्टर ए सीतापुर रोड योजना में रहने वाले गनर हेड कांस्टेबल चंद्रपाल। सभी जेल में हैं।

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