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चिकित्सा उपकरण आएंगे मूल्य नियंत्रण के दायरे में

medicalनई दिल्ली : देश में चिकित्सकीय उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार उन्हें उचित मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराने के लिए मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाएगी। केंद्रीय रसायन एवं उवर्रक मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि जिस प्रकार आवश्यक दवाओं की सूची बनाकर उनके मूल्य नियंत्रण में रखे गए हैं, वैसी ही व्यवस्था भविष्य में चिकित्सकीय उपकरणों के लिए भी की जाएगी। चिकित्सकीय उपकरणों को लेकर मंत्रालय की टास्क फोर्स की रिपोर्ट जारी करते हुए कुमार ने कहा कि देश में अभी 70 फीसदी चिकित्सकीय उपकरण विदेशों से आयात होते हैं और मध्ययम एवं निम्म श्रेणी के सिर्फ 30 फीसदी उपकरणों का ही देश में निर्माण हो रहा है। चिकित्सकीय उपकरणों का कारोबार करीब साठ हजार करोड़ रुपये सालाना का है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में चिकित्सकीय उपकरणों में देश सिर्फ न सिर्फ आत्मनिर्भर होगा बल्कि विदेशों को भी आयात करेगा।
टास्क फोर्स ने सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश यह की है कि इस समय बाजार में चिकित्सकीय उपकरणों के दामों में भारी अंतर है। दिल में लगने वाले विभिन्न कंपनियों के स्टंट की कीमतों में लाख रुपये से भी ज्यादा का फर्क है। इसलिए समिति चाहती है कि जरूरी चिकित्सा उपकरणों की एक सूची बनाई जाए तथा उनके मू्ल्यों को नियंत्रित किया जाए। जिस प्रकार करीब छह सौ दवाओं के मूल्य नियंत्रित हो रहे हैं। ताकि आम आदमी को उचित मूल्य पर चिकित्सकीय उपकरण मिल सकें। उन्होंने टास्क फोर्स की सिफारिशों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें चिकित्सा उपकरणों के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, चिकित्सकीय उपकरणों के निर्माण के लिए विशेष पार्क बनाए जाने, चिकित्सकीय उपकरणों के लिए अलग नियामक नियुक्त किए जाने, अलग विभाग का गठन किए जाने आदि की सिफारिशें प्रमुख हैं। इन पर सरकार सैद्धान्तिक रूप से सहमत है और दवा विभाग के सचिव से कहा गया है कि वे चरणबद्ध तरीके से इन सिफारिशों को लागू करें

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