नरेंद्र मोदी ने Tweet करके बताएं त्रिकोणासन व उष्ट्रासन के फायदों के बारे में

1 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। योगा के कितने फायदे है इस बात से तो पूरा विश्व ही वाकिफ है।। योग के विभिन्न आसानों के बारे में लोगों को मालूम चले इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Twitter पर रोजाना एक योग के बारे में Tweet में करके उस आसान की विधि और उससे होने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Twitter के जरिए ने त्रिकोणासन व उष्ट्रासन के बारे में tweet किया है। आइए जानते है इन आसनों के फायदों और विधि के बारे में –
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कैसे करें त्रिकोणासन दोनों पैरों को कंधों के समान अंतर पर फैलाकर खड़े हो जाएं। पहले दाहिने तरफ झुक जाएं और अपने पैरों के उंगलियों को छूने की कोशिश करें और दूसरे हाथ को उसी दिशा में ऊपर की ओर उठाकर रखें। हथेली खुली हुई होनी चाहिए। दस से तीस सेंकेड तक उसी मुद्रा में रहें। वैसे ही बायें तरफ झुक कर करें। ज़रूरी नहीं आप पहले ही दिन पैरों के उंगलियों को छू सके। अगर न हो सके तो घुटनों को छू सकते हैं। धीरे-धीरे इसमें सुधार आएगा।
सावधानी – अगर आपको स्लिप डिक्स, पेट में किसी प्रकार की सर्जरी या साइटिका पेन की शिकायत है तो इस योगासन को न करें।
त्रिकोणासन के फायदे- इसे करने से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और फेफड़ों की क्षमता में सुधार आता है। त्रिकोणासन से कब्ज़ के रोगी के लिए भी वरदान स्वरूप है। इस योगासन से आजकल की आम बीमारी तनाव से भी मुक्ति मिल सकती है।
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उष्ट्रासन कैसे करें उष्ट्रासन हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए। वज्रासन मे बैठ जाएं। बाजुओं को धड़ के साथ रखकर घुटनों को एक साथ जोड़कर रखें और पैरों को भी। लेकिन अगर यह मुश्किल लगे तो अलग भी रख सकते हैं। अब पीछे की तरफ झुकें, और दाएं हाथ से दाई एड़ी को पकड़ने की कोशिश करें और बाएं हाथ के साथ बाएं एड़ी को। उदार को आगे बढ़ाएं, जांघों को सीधा रखने की कोशिश करें, और जितना संभव हो सिर और मेरुदंड को पीछे झुकाएं। जब खिंचाव महसूस हो तब पूरे शरीर, विशेष रुप से पीठ की मांसपेशियों को शिथिल करने की कोशिश करें। शरीर का वजन समान रूप से पैरों और भुजाओं पर होना चाहिए। पीठ का धनुष जैसा आकार बनाए रखने के लिए भुजाओं को कंधों का सहारा दें। जितनी देर तक आरामदायक लगे, उतनी देर अंतिम स्थिति में रहें। धीमी गति से हाथों को एक एक करके एडियों से हटाएं और शुरु की स्थिति पर लौंटे।
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सावधानियां – जोर से या झटके से इस आसन को न करें। पीछे झुकते समय जंघा सीधी रखें। अंतिम स्थिति में गर्दन से लेकर घुटने तक का भाग सीधा रहेगा। वापस आते समय झटका देकर न आएँ। जिन लोगों को हर्निया की शिकायत हो उसे यह आसान नहीं करना चाहिए।
उष्ट्रासन के फायदे उष्ट्रासन करने से सीने का भार कम होता है। तथा कमर और गर्दन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। उष्ट्रासन करने से पेट साफ रहता है। पाचन शक्ति बढ़ जाती है। और शरीर के होर्मोन्स नियंत्रित होते हैं। चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए भी यह आसन गुणकारी होता है। यह आसन lower back pain और पीठ के दर्द को दूर करने में सहायक होता है। और कमर के निचले हिस्से को इस आसन से आराम पहुचता है। स्लिपडिस्क और सायटिका जैसी कष्टदायक तकलीफ़ें उष्ट्रासन करने से दूर हो जाती हैं। उष्ट्रासन करने से रीड़ की हड्डी सीधी होती है तथा लचीली बनती है।



