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बॉलीवुड सेलेब्रिटीज बच्चों को दे रहे मां सा प्यार, पिता की पैरेंटिंग ऐसी होती है…रिसर्च कर देगी दंग!

96362-indiagrowthबचपन से ही पैरेंट्स की नजदीकी और विश्वास बच्चों को फ्यूचर में बहुत मदद करता है। इससे बच्चों में सोशल और फै्रंडशिप स्किल डवलप होती है। पिता की भूमिका इसमें अहम है, क्योंकि उसके पैरेंटिंग का तरीका मदर से अलग होता है। वह बच्चे को ज्यादा सोशल बनाता है, वहीं बच्चे भी फादरहुड को काफी एंजॉय करते हैं। फादर और चिल्ड्रन के एेसे रिलेशनशिप को लेकर हमेशा से ही कई रिसर्च होते रहे हैं। रिसर्चर्स की मानें, तो पिता और बच्चे की रिलेशनशिप बहुत खास होती है। बच्चे को पालना माता-पिता दोनों की साझी जिम्मेदारी है। इसका बच्चे के विकास पर भी प्रभाव पड़ता है। पैरेंटिंग में पिता की भूमिका खास होती है। साइंस भी इस बात की पुष्टि करती है कि जो पिता मां की तरह बच्चे के सारे काम करते हैं, वे आगे चलकर सोशल लाइफ में सक्सेसफुल भूमिका निभाते हैं। बॉलीवुड सेलेब्रिटीज तक अपने बच्चों की केयर उनकी मां की तरह कर रहे हैं…

पैरेंटिंग में हार्माेनल रेस्पॉन्स

मैन और वीमन के पैरेंटिंग तरीकों में हार्मोनल रेस्पॉन्स देखने को मिलते हैं। दोनों में ऑक्सीटोसिन बढऩे से अलग-अलग प्रतिक्रि याएं होती हैं। महिलाओं में जहां यह इमोशन के रूप में नजर आता है, वहीं पुरुषों में यह योजना बनाने और समझ के रूप में देखने को मिलता है। साथ ही एक नई स्टडी पर गौर करें, तो न्यू पैरेंट्स में बॉन्डिंग बिहेवियर में भी काफी डिफरेंस देखे जा सकते हैं। पांच महीने के बच्चे के साथ मदर जहां उसकी आंखों में देखकर उसे खिलाएगी और उसे टच करेगी, वहीं फादर बेबी को उठाने और उत्तेजित करने की कोशिश करेगा। वह बच्चे को ज्यादा से ज्यादा हंसाएगा।

पैरेंटिंग क्राइटेरिया

गुड पैरेंटिंग का क्राइटेरिया मॉम्स और डैड का एक जैसा होता है। लेकिन बच्चों की मानसिकता भी इस पर असर करती है। उदाहरण के तौर पर देखें, तो बच्चों के किसी भी खेल में यदि मदर इंटरफेयर करती है, तो उनको बुरा लगता है, लेकिन यदि पापा उनके खेल में दखलअंदाजी करते हैं, तो वे दुखी नहीं होते। एक अन्य फादर फ्रैंडली एसेसमेंट टैस्ट पर गौर करें, तो उसमें भी बच्चों की मानसिकता नजर आएगी। इसके लिए रिसर्चर्स ने एक बच्चे को बिना खिलौनों के साथ लैब में बिठाया और फिर पैरेंट्स से उसे हंसाने का कहा। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा की ओर से हुए इस लॉफिंग टास्क रिसर्च में 107 पैरेंट्स को शामिल किया गया था। इसमें मदर के मुकाबले फादर्स ने फनी फेसेज बनाकर बच्चों को खूब हंसाया। रिसर्चर्स की मानें, तो इस दौरान रीयल फादरहुड देखने को मिला।  

पिता करते हैं एन्करेज

ओहायो की केंट स्टेट यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजिकल साइंसेज प्रोफेसर केन्र्स और उनकी टीम की ओर से किए इस रिसर्च में फादर और चाइल्ड की शानदार बॉन्डिंग भी देखने को मिली। बच्चों ने अपने फादर के साथ अपनी रिच और वॉर्म रिलेशनशिप डिस्क्राइब की। बच्चों का कहना था कि पिता उन्हें आगे बढऩे के लिए एन्करेज करते हैं, साथ ही किसी भी काम को अच्छे से करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। रिसर्च में सामने आया कि बहुत सारे फादर स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतर पाए। लेकिन इनकी बॉन्डिंग शानदार थी। इस रिसर्च में फादर कंट्रीब्यूशन पर चर्चा हुई। इसमें कई तरह के क्वेश्चंस उठे। किस तरह से एक पिता अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए एन्करेज करते हैं, ताकि उनमें कॉन्फिडेंस देखा जा सके। रिसर्च में यह भी सामने आया कि फादर बच्चों को खेलने की ज्यादा

छूट देते हैं।

वे बच्चों के साथ खुलकर एंजॉयमेंट करते हैं, जिससे उन्हें खेलने और आगे बढऩे का मोटिवेशन मिलता है। एक अन्य स्टडी में यह भी निकलकर आया है कि फादर को बच्चों को खिलाने में टॉयज की जरूरत नहीं होती, वो अपने फेस और बॉडी लैंग्वेज के जरिए ही बच्चे को हंसा और खिला देते हैं। वाकई एक पिता में बहुत-सी खूबियां होती हैं, वो डांटते जरूर हैं, लेकिन फिर भी बच्चों को खुलकर खेलने की छूट भी देते हैं, जो डवलपमेंट के लिए बेहद जरूरी है।

इमरान खिलाते हैं खाना

एक गर्भवती स्त्री बच्चा पैदा होने से पहले ही उसके बारे में सोचना शुरू कर देती है। बच्चा पैदा होने के बाद उसकी चिंता और बढ़ जाती है। ऐसे में अगर पिता भी छुट्टियां ले ले और उसके साथ रहे तो नई मां की चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। एक्टर इमरान खान ने भी कुछ ऐसा ही किया था। जब उनकी बेटी हुई तो उन्होंने फिल्मों से कुछ वक्त के लिए अवकाश ले लिया। इमरान के मुताबिक, ऐसी चीजें आपकी जिंदगी में एक या दो बार होती हैं। ऐसे में किसी भी कीमत पर ये पल गंवाना नहीं चाहता। एक पिता होने के नाते मैंने महसूस किया कि बेटी को लेकर मैं हमेशा नर्वस रहता था। क्या मैं सही कर रहा हूं? क्या मैं गलत कर रहा हूं? क्या मैंने उसे ठीक से खिलाया है? कहीं यह भूखी तो नहीं रह गई? कहीं मैंने इसे ओवरईटिंग तो नहीं करवा दी? ऐसे तमाम सवाल मेरे मन में रहते थे। मैंने शिद्दत से महसूस किया है कि बच्चा होने के बाद एक पति को अपनी पत्नी के पास रहना ही चाहिए। मैं जानता था कि बच्चे पैदा करना मां को नए जीवन मिलने जैसा है, इसीलिए जब मेरी पत्नी मां बनने वाली थी तो मैं उसे लेकर प्री-नेटल योगा क्लास तक जाता था, ताकि प्रसव में उसे कोई परेशानी न हो।

रितेश देशमुख ने बदले डायपर

रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा भी अपने बच्चे को मिलकर पाल रहे हैं। जेनेलिया कहती हैं कि रितेश ग्रेेट फादर हैं। वे बेटे के डायपर चेंज करते हैं। उसे नहलाते हैं। यहां तक कि रात में उसके रोने पर उठकर बैठ जाते हैं और उसे हाथों में झुलाते हैं। आमिर खान भी अपने बेटे के डायपर बड़े प्यार से बदलते हैं। व्यस्त होने के बाद भी ये सेलेब्रिटीज एक अच्छे पिता के भूमिका निभा रहे हैं।

सब कुछ करें

अगर मौका मिले तो बच्चे के डाइपर्स शायद ही कोई पुरुष बदलना चाहता है, लेकिन यह एक ऐसा काम है जो एक पति को आधी रात को नींद से उठ कर करना ही चाहिए। बच्चे का मुस्कुराता चेहरा आपकी सारी कुंठा गायब कर देगा। इमरान कहते हैं कि वह तो डाइपर्स बदलने में माहिर हो चुके हैं। असल में वह पहले अंकल मंसूर और आमिर खान के बच्चों के भी डाइपर बदल चुके हैं और उन्हें बोतल से दूध पिला चुके हैं।  चुके हैं और उन्हें बोतल से दूध पिला चुके हैं।

संस्कार भी दें

पेरेंटिंग में साझी जिम्मेदारी का मतलब ही यही है कि जो कुछ आपके पास है, आप अपने बच्चों को दें। इसमें संस्कार और मजबूत आर्थिक स्थिति भी शामिल है। बच्चों का शिक्षा-दीक्षा बेहतर बनाने के लिए, जितनी मेहनत की जरूरत है, एक पिता होने के नाते करें। बच्चों में शुरू से ही यह समझ डालें कि उन्हें वही लाइफस्टाइल अपनानी है, जो उनके पेरेंट्स की है। उनके पेरेंट्स उनके लिए बहुत ही मेहनत कर रहे हैं, जिसका उन्हें सम्मान करना है।

 

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