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भारत में बढ़ती करोड़पतियों की संख्या

RICHनयी दिल्ली (एजेंसी)।भारत की प्रगति का सूचकांक अगर करोड़पतियों की संख्या से निकाला जाये तो भारत की प्रगति असाधारण है, क्योंकि क्रेडिट सुईस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा हाल ही जारी ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2013 के अनुसार भारत में फिलहाल 1860 अल्ट्रा हाई नेटवर्क इंडिबिजुअल्स है जिनके पास 5 करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति है। 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा वाले 880 लोग है।
वर्ष 2000 में भारत में प्रति वयस्क संपत्ति 2000 डॉलर थी जो वर्ष 2013 में 135 प्रतिशत बढ़कर4800  डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार 7 प्रतिशत सालाना वृद्धि रिकॉर्ड की गई है। देश में वयस्कों की संख्या 35 प्रतिशत बढ़ी है, इस हिसाब से कुल संपत्ति इस दरम्यान तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई।
सर्वे में ऐसा अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2017 तक भारत में करोड़पतियों की संख्या तीन लाख के ऊपर पहुंच जायेगी अभी देश में एक लाख 72 हजार लोगों की गिनती करोड़पतियों में है। संपत्ति सृजन के मामले में उत्तर अमरीका 11.9 प्रतिशत, यूरोप 8.8  प्रतिशत और तीसरे नंबर पर भारत है। भारत के ये आंकड़े वह तस्वीर प्रस्तुत करते है कि अमीर की अमीरी बढ़ रही है और गरीब की गरीबी बढ़ रही है।
केन्द्रीय शासन ने जब खाद्य सुरक्षा कानून बनाया तब बड़े गर्व से कहा कि देश के 121 करोड़ लोगों में से 72  करोड़ को इस कानून से रोटी का अधिकार मिलेगा यानी गेहूं, चावल अन्य मोटा अनाज 2-3 रूपये प्रति किलो मिलेगा, राज्यों ने एक कदम आगे बढ़कर गेहूं एक रूपया किलो करके अपना 1 रू. प्रतिकिलो का योगदान भी दे दिया जिसका लाभ कितनों को वास्तव में मिला यह तथ्य असली है जो पर्दे में है।
किसी भी देश के लिये यह गौरव की बात नहीं है कि उसके यहां करोड़पतियों की संख्या में कितना इजाफा हुआ, बल्कि असली बात तो है कि गरीबों की संख्या घटी या नहीं। भारत में जब कोई योजना लायी जाती है तो शान से कहा जाता है ८२ करोड़ को लाभ मिलेगा पर क्या यह शान की बात है कि आजादी के ६ दशक बाद देश में गरीब ६७ प्रतिशत है। गरीबी का प्रतिशत भयावह है। मध्यम वर्ग जो एक प्रकार से गरीब ही है उनका प्रतिशत ३२.९९ है, करोड़पतियों का प्रतिशत .००१ भी नहीं, देश की १२१ करोड़ की आबादी का महज .००१ प्रतिशत ही व्यापारिक घराने है जो चंद है उन्हीं की आय परिवार में बंट जाती है तो फर्म या कंपनी से इतर निजी आय बन जाती है।
देश के कर्णधारों को इस गंभीर मुद्दे का गहन अध्ययन करना होगा कि ६७ प्रतिशत लोगों में से कितनों को ऊपर लाया जा सकता है वह होगा तभी जब मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित पारश्रमिक मिले, अभी उद्यमी को ९० प्रतिशत और लाखों मजदूरों को मात्र १० प्रतिशत मिलता है जो कभी गैर बराबरी समाप्त नहीं करेगा संविधान में दिये गये बराबरी के दर्जे को हम कभी पूरा नहीं कर पायेगें।

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