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यूपी में गन्ने पर मची गदर, सड़कों पर उतरे किसान

दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ farmer-56afb9aa24975_exlst
बकाया भुगतान और गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के हजारों कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पूरे पश्चिमी यूपी समेत राज्य के कई हिस्सों में सड़कों को जाम कर दिया। इससे कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई रूट डायवर्ट करने पड़े।

कई रूटों पर बसों व अन्य वाहनों का संचालन ठप होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। आंदोलन के दौरान किसानों ने गन्ने की होली जलाई।

आंदोलन का असर उत्तराखंड और हरियाणा तक देखने को मिला। बुलंदशहर, हापुड़ और गाजियाबाद में भी चक्काजाम से लोग परेशान रहे। हालांकि प्रदेश सरकार के आश्वासन के बाद देर शाम धरना-प्रदर्शन खत्म हो गया।

भाकियू ने एक फरवरी को सड़क जाम करने की चेतावनी दी थी। इसके मद्देनजर किसान सोमवार को सड़कों पर आ डटे। आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मेरठ और मुरादाबाद मंडल में देखने को मिला। बरेली में भी इसका असर रहा।

शामली, बागपत और सहारनपुर में दिन भर जाम लगाने के बाद किसान शाम को हट गए। मुजफ्फरनगर और बिजनौर में किसान देर शाम तक डटे रहे।

मेरठ बाईपास सात घंटे तक भाकियू कार्यकर्ताओं के कब्जे में रहा। जिससे वाहनों की कई किमी लंबी लाइनें लग गईं। पुलिस ओर प्रशासनिक अधिकारियों के काफी प्रयास के बावजूद भाकियू कार्यकर्ता नहीं माने।

यहां दिखा जाम का सबसे ज्यादा असर
गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर में एनएच-58, गाजियबाद में एनएच-24, बिजनौर में दिल्ली-पौड़ी नेशनल हाईवे, मेरठ बाईपास, मेरठ-करनाल हाईवे, मेरठ-बागपत रोड, दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, सहारनपुर में अंबाला-देहरादून हाईवे, मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ हाईवे, हरिद्वार और संभल में मुरादाबाद-आगरा मार्ग, बरेली में बरेली-बदायूं रोड, पीलीभीत में टनकपुर हाइवे, शाहजहांपुर में नेशनल हाईवे बाधित रहा जहां जाम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। जिलों में जगह-जगह लगे जाम से आमजन परेशान रहे। बीमार लोगों और स्कूली बसों को जाम के दौरान नहीं रोका गया।

लखीमपुर के पलिया में किसानों ने भुगतान की मांग को लेकर जीएम केन को बंधक बना लिया और गन्ना भुगतान करने के बाद ही छोड़ने का एलान किया। एसडीएम के हस्तक्षेप पर जीएम केन को मुक्त कराया जा सका।

प्रदर्शन पर भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत का कहना है कि लखनऊ में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में शासन के मुख्य सचिव आलोक रंजन से मुलाकात कर समस्याएं रखी थीं। इस पर उन्होंने समस्या के हल के लिए 15 दिन का समय मांगा है।

गन्ना किसानों ने मोदीनगर, हापुड़, गढ़ और बुलंदशहर में भी हाईवे जाम रखा। गुलावठी में स्टेट हाईवे-235 पर जाम में फंसने से गर्भवती की सरकारी एंबुलेंस में ही डिलीवरी हो गई।

औरंगाबाद में किसानों की जिद के सामने सपा विधायक को अपना काफिला लौटाना पड़ा। जबकि मोदीनगर में जाम में फंसे डीआईजी (जेल) मेरठ को नहीं निकलने दिया गया। मजबूरन उन्हें वापस लौटना पड़ा।

इसलिए है किसानों में आक्रोश
– तीन साल से गन्ना मूल्य में कोई वृद्घि नहीं, समय पर भुगतान भी नहीं।

– 6500 करोड़ रुपये बकाया है किसानों का दो साल का।
सरकार राहत दे भी रही है तो चीनी मिलों को किसान हाशिये पर।

– 2800 करोड़ रुपये देकर सरकार ने मदद की थी मिलों की।

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