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लोकगीतों के प्रति ज्यादा आकर्षण : फाल्गुनी

phनई दिल्ली (एजेंसी)। अपने रोमांसप्रधान गीतों से 90 के दशक के आखिर में पॉप संगीत को नए आयाम देने वालीं फाल्गुनी पाठक ने डांडिया की धुनों के साथ कई ऐसे लोकगीत भी दिए हैं जिन्होंने एक बड़ी आबादी को आकर्षित किया है। लंबे समय से नवरात्रि समारोहों में आकर्षण रहीं 42 वर्षीया फाल्गुनी ने अपने ‘एंद्रा मेरुवा गयी’ ‘छम छम पायलिया’ और ‘आयी रे मिलन की रात उम्बरे उभी’ जैसे गीतों पर लोगों को खूब थिरकाया है।
फाल्गुनी ने कहा, ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि अन्य पॉप गीतों की तुलना में लोकगीतों के प्रति ज्यादा आकर्षण है और हम हमेशा लोकगीतों से जुड़े रहने की कोशिश करते हैं। वे बहुत स्वाभाविक होते हैं और उनमें नकलीपन नहीं होता। मैं खुद लोकगीतों का आनंद लेती हूं। इसलिए इनके नजदीक रहने की कोशिश करती हूं।’ वह यह स्वीकार करने में नहीं हिचकिचातीं कि जब भी वह संगीत के विषय में सोचती हैं तो लोकगीत उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। फाल्गुनी ने ‘याद पीया की आने लगी’  ‘मैंने पायल है छनकाई’  ‘मेरी चुनर उड़ उड़ जाए’ और ‘ओढनी’ जैसे गीतों से पॉप संगीत में भी धूम मचाई थी। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी टीम को देती हैं।

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