अपनी शादी में भैंसागाड़ी लेकर पहुंचे थे मुलायम, एक बार उड़ा दी थी खुद की मौत की अफवाह

78 साल के हो चले मुलायम सिंह यादव भले ही आज अपने बेटे से राजनीतिक लड़ाई हार गए हो, लेकिन मुलायम कभी राजनीति के माहिर खिलाड़ी थे। पुराने लोगों की जुबान पर आज भी तमाम ऐसे किस्से हैं, जो नेताजी को सियासत के मैदान में कुछ अलग खड़ा करते हैं। आइए जानते हैं मुलायम सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प और अनसुनी कहानियां, जब मुलायम ने अपने दिमाग से विरोधियों को चंद मिनटों में चित कर दिया-

बात 1982 की है, जब मुलायम सिंह यादव एक शादी समारोह में जा रहे थे तभी कुछ गुंडों ने उनके काफिले पर हमला कर दिया। मुलायम को यह बात तुरंत समझ में आ गई कि यह हमला उनको ध्यान में रख कर किया गया है। मुलायम का दिमाग तुरंत चला और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि जोर से चिल्लाओ कि ‘नेताजी मर गए’।
मुलायम के कहने पर सुरक्षाकर्मियों ने ऐसा ही किया। सुरक्षाकर्मियों से यह सुनकर कि ‘नेताजी मर गए’ बदमाश वापस चले गए। उन्हें लगा कि उनका हमला सफल हो गया। इस तरह नेताजी अपनी सूझ-बूझ से सही- सलामत बचे रहे। इस घटना में एक कार्यकर्ता की मौत भी हो गई थी।
मुलायम सिंह यादव की पहली शादी घरवालों ने 18 साल की उम्र में ही कर दी गई थी। मुलायम उस वक्त दसवीं की पढ़ाई कर रहे थे। लोगो बताते हैं कि उस वक्त गाड़ी-मोटर का इतना चलना नहीं था इसलिए मुलयाम कि बारात भैसागाड़ी में गई थी। मुलायम 5 भैसागाड़ी लेकर अपनी शादी में पहुंचे थे।
मुलायम बचपन से ही लोगों के हक में अपनी आवाजें उठाते रहें हैं। एक ऐसा ही किस्सा 1954 का है, जब राममनोहर लोहिया ने सिंचाई की दरों में इजाफा के विरोध में जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया था। मुलायम उस वक्त मात्र 14 साल के थे, लेकिन उनके हौसलों में कमी नहीं थे।
मुलायम भी जेल जाने के लिए चल दिए लेकिन जेलर ने उनकी उम्र का हवाला देते हुए जेल में डालने से मना कर दिया। लेकिन मुलायम वहीं अड़ गए। मुलायाम ने जेलर से कहा- मैं इस मुद्दे पर किसानों के साथ हूं। मैं विरोध प्रदर्शन में उनके साथ हूं। मैं वापस नहीं जाउंगा, आपको मुझे जेल में डालना ही होगा। मुलायम की जिद के बाद आखिरकार जेलर को उन्हें जेल में डालना ही पड़ा।भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन बताते हैं, ‘मुझे यह कहने में कोई दिक्कत नहीं है कि वे यारों के यार हैं। ऐसे यार, जो रिश्तों में कभी सियासत को नहीं आने देते और लाभ का मौका होने पर भी कभी घटिया सियासत नहीं करते। घटना मुझसे ही जुड़ी है।
मेरे जन्मदिन पर कुछ लोगों ने साड़ी वितरण का कार्यक्रम रखा था। भीड़ के कारण उसमें दुखद हादसा हो गया। मुलायम उस समय मुख्यमंत्री थे। मैं नेता प्रतिपक्ष। चुनाव भी नजदीक था।
तमाम लोगों ने इसे सियासी रंग देने की कोशिश की। मुलायम सिंह बाहर थे। सूचना मिलते ही वह लखनऊ आए और सीधे हमारे घर पहुंचे। ऐलान किया कि यह सिर्फ हादसा है, हादसे के अलावा और कुछ नहीं।’