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अपराधियों की ‘खुशामद’ में जुटी पुलिस


जाहिर है जब अपराधी ही सुधर जाएंगे तो अपराध करने वाले होंगे ही नहीं और समाज में चैन-अमन के साथ लोग गुजर-बसर कर सकेंगे। मौजूदा हालात में ये बात हालांकि बड़ी है दूर की कौड़ी लगती है लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जो कोशिश शुरू हुई है वो काबिल-ए-तारीफ है।
दूसरे सूबों की पुलिस को भी औरंगाबाद पुलिस की ‘क्रिमिनल अडॉप्शन स्कीम’ की सराहना करनी चाहिए और आत्मसात भी।