

इस मामले से जुड़े खास बिंदु
- केंद्र सरकार ने अफसरों के इस निलंबन को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया है। उसका कहना है कि ऐसी कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री की स्वीकृति जरूरी है।
- दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया, यह ऑड-ईवन प्लान लागू करने के एक दिन पहले क्यों हुआ। क्या यह साजिश हैं? आम आदमी पार्टी ने भी बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अफसरों को ‘उकसाने’ का आरोप लगाया है। उधर, सीएम केजरीवाल ने एक ट्वीट में इन अफसरों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने लिखा, ‘इन अधिकारियों के लंबी छुट्टी पर जाने से लोगों को खुशी होगी। सरकार पेड लीव देने को तैयार है। इससे सरकार ईमानदार बनेगी।’
- अफसरों के बड़े स्तर पर छुट्टी पर जाने से आड-ईवन का गुरुवार का ट्रायल प्रभावित हुआ। इस फार्मूले को दिल्ली में शुक्रवार से लागू किया जाना है।
- ये अफसर, विशेष सचिव यशपाल गर्ग और सुभाष चंद्रा के निलंबन का विरोध कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों ने आप कैबिनेट की ओर से वेतन बढ़ाने के लिए गए निर्णय पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। इनका तर्क था कि निर्णय को एलजी की मंजूरी मिलना जरूरी है। एलजी दिल्ली में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- विरोध पर आमादा अफसरों का कहना है कि केवल एजल को इन अधिकारियों पर कार्रवाई करने का अधिकार है। ये अफसर दिल्ली, अंडमान-निकोबार सिविल सेवा कैडर के हैं। इस तर्क का केंद्र ने समर्थन किया है।
- राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न विभागों में काम कर रहे करीब 70 आईएएस अफसरों ने आधा दिन काम करने की चेतावनी दी है।
- बड़े पैमान पर लिए गए इस अवकाश से दिल्ली में ऑड-ईवन योजना की तैयारियों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। इनमें से ज्यादा अफसर रोड राशनिंग प्लान से संबद्ध हैं।
- एक अधिकारी ने कहा, ‘दिल्ली सरकार को इन अफसरों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। यह केवल इनके निलंबन की सिफारिश कर सकती है। कार्रवाई का हक गृह मंत्रालय की इजाजत के बाद एलजी को है।’
- दिल्ली में वर्ष 2015 के फरवरी में आम आदमी पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद से केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच लगातार विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध की स्थिति है।