
पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया तेजी से पूरे देश में क्रांति की तरह फैल रहा है,सुदूर प्रान्तों में रह रहे लोगों से सम्पर्क के साथ साथ कई सूचनाओं को तुरंत प्रत्येक जगह पहुंचाने में मदद करने वाले इस माध्यम से आज लगभग सभी लोग जुड़ रहे हैं। परन्तु डिजिटल युग में वरदान साबित होने वाले इस माध्यम के लगातार हो रहे दुरुपयोग एवं तरह तरह के झूठे अफवाहों के फैलाने से अब यह माध्यम अभिशाप बनता जा रहा है। हाल ही में बच्चा चोरी गिरोह के अफवाह ने 22 लोगों की जान ले ली वहीं कई बार देश की सुरक्षा, राजनेताओं, अभिनेताओं, बीमारियों एवं कई प्राकृतिक घटनाओं के बारे में भी व्हाट्सएप्प और फेसबुक के माध्यम से अफवाह फैलाई जाते हैं और इसके दुष्परिणाम स्वरूप लोग परेशान हो जाते हैं या इतिहास पर प्रश्न खड़े होते हैं साथ ही कई लोगों की छवि खराब होती है।
मुफ्त के लाभ, मुफ्त की योजनाओं तथा कई अन्य अफवाहों को इंटरनेट के लिंक के साथ शामिल कर के भेजने का कार्य भी कुछ लोग करते हैं और जानकारी के अभाव में उन लिंक्स के प्रयोग से हमारी कई सूचनाएं इन तक पहुंच जाती हैं जो हमारे लिए खतरा है, कई बार बैंक खातों से भी पैसों की निकासी इस तरह के गलत अफवाहों या गलत लिंक से हो जाती है, अतः इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए और बिना सत्यता की जांच के ऐसे संदेशों को साझा करने से बचना चाहिए।बिना सत्यता की परख के किसी भी समाचार को साझा करना आज सोशल मीडिया की विश्वसनीयता को कम कर रहा है और यह देश के विकास में एक अवरोध साबित हो सकता है।
किस प्रकार के समाचारों से हो रही है समस्या : वर्तमान में सोशल मीडिया पर फैलाये जाने वाले अफवाहों से सामाजिक विभेद से लेकर जान जाने तक की नौबत खड़ी हो रही है। हाल में ही बच्चा चोरी गिरोह के बारे में फैले अफवाह से जहां 22 लोगों की जान जा चुकी है ठीक वैसे ही बाल काटने वाली झूठी खबर एवं इस तरह की अन्य खबरों से भी कई बार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। बात केवल यहीं तक सीमित नहीं है अफवाहों का आलम यह है कि देश के इतिहास से लेकर देश की वर्तमान स्थिति तक से खिलवाड़ हो रहा है। इनमें से कुछ संदेश इस प्रकार के होते हैं जिनके द्वारा साम्प्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की भी कोशिश की जाती है, तकनीक के प्रयोग से बदलाव किए हुए तस्वीरों एवं चलचित्रों के माध्यम से लोगों को एक दूसरे के विरोध में उकसाने का प्रयास किया जाता है और फिर यह देश मे विभेद उतपन्न करने लगता है। सोशल मीडिया माध्यम के प्रयोग से ही कुछ सन्देशों द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले रूप में गढ़ कर ऐसे प्रसारित किया जाता है जिस से लोग इसे जल्दी से जल्दी दूसरे स्थानों तक पहुंचाएं और इसका दुष्प्रभाव पूरे देश में फैले,यहीं नहीं मार्मिक भावनाओं को जागृत करने वाले संदेशों को भी अधिक से अधिक संख्या में फैलाया जाता है। कुछ ऐसे संदेश भी होते हैं जो अपने साथ कुछ लिंक या कुछ ऐसे तत्व साथ रखे होते हैं जिनके द्वारा मोबाइल का डेटा चोरी होने का, बैंक एकाउंट से पैसे निकाले जाने का, इंटरनेट पर स्थापित कई एकाउंट की सुरक्षा तोड़ने जैसे कार्य आसानी से किये जा सकते हैं और लोग इनके जाल में फंस कर आसानी से खुद की सुरक्षा कमजोर कर लेते हैं। धार्मिक विवाद को बढ़ावा देने वाले,कसम,कुछ अप्रिय घटना के घटित होने वाले,पुनर्जन्म की व्याख्या करने वाले, त्योहारों पर आधारित संदेश जो पूर्णतः अंधविश्वास पर आधारित होते हैं रोज लाखों की संख्या में अग्रेसित किये जाते हैं।
किस प्रकार के लोग होते हैं शिकार : प्रायः वैसे लोग जो धर्म को लेकर जल्द ही उत्तेजित हो जाते हैं, अंधविश्वास में विश्वास रखते हैं,भावनात्मक रूप से अतिसंवेदनशील होते हैं, इंटरनेट के नए उपयोगकर्ता होते हैं अथवा इंटनेट द्वारा मुफ्त में लाभ पाने के आकांक्षी होते हैं वैसे लोग इस तरह के संदेशों के शिकार होते हैं। ऐसे लोग अल्पज्ञान में अथवा अति उत्तेजना में बिना सत्यता की जांच किये हुए ऐसे सन्देशों पर विश्वास कर लेते हैं और बिना जरा देर किए इस तरह के संदेशों को अग्रेषित करते हैं। यह कहानी बस अल्पज्ञानियों तक ही सीमित नहीं है बहुत से ऐसे लोग भी समाज में हैं जो शिक्षित हैं परंतु अपने नाम की लोकप्रियता हेतु ऐसे सन्देशों में अपने नाम को संपादित कर एक दूसरे तक अग्रेषित करते हैं और यह कड़ी एक एक कर आगे बढ़ती रहती है।
किस प्रकार के लोगों द्वारा फैलाये जाते हैं ये संदेश : गौरतलब करने वाली बात है कि ये संदेश इतनी मात्रा में केवल एक व्यक्ति अथवा एक समूह द्वारा नहीं फैलाया जा सकता है, इस प्रकार के संदेशों को फैलाने के पीछे कुछ उद्देश्य होता है साथ ही अलग अलग तरह के संदेश अलग अलग व्यक्तियों के समूह द्वारा फैलाया जाता है। ऐसे संदेशों को फैलाने वाले लोगों में संस्कृति को नुकसान पहुंचाने वाले,धार्मिक महत्व को क्षति पहुंचाने वाले, साम्प्रदायिक सद्भाव को हानि पहुंचा कर देश और समाज को विभक्त करने की मानसिकता रखने वाले लोग शामिल होते हैं,ये लोग किसी एक धर्म , जाति या समुदाय से ही संबंध नहीं रखते हैं। इसमें कुछ ऐसे लोग भी हैं जो तकनीक के प्रयोग से साइबर क्राइम के अंतर्गत कार्य करते हैं और पैसों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्था को अपने चपेट में लेते हैं,साथ ही कुछ ऐसे लोग होते हैं जो सूचना प्रद्योगिकी समिति (आई टी सेल) के सदस्य होते हैं और राजनीतिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।
ऐसे सन्देशों से बचने के लिए क्या करें : सबसे पहले हम अपने दिमाग से अंधविश्वास को दूर करें और साथ ही साथ यह जान लें कि कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती है, अगर आप धार्मिक उत्तेजना के शिकार हैं तो सर्व प्रथम यह अपने अंदर समाहित करें कि कोई भी धर्म हिंसा अथवा किसी व्यक्ति विशेष या धर्म विशेष को नुकसान पहुंचाने की सलाह नहीं देता है अतः धार्मिक मान्यताओं पर आधारित सन्देशों को अपने विचार से जांच कर ही अग्रेषित करें। साथ ही ऐसे संदेश जो देश की सुरक्षा, वित्त,इतिहास अथवा वर्तमान समय पर आधारित हो उन्हें अग्रेषित करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य ही कर लें। आज कल कुछ समाचार के स्रोत भी गलत समाचार फैलाते हैं अतः उनपर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। अभी तक सरकार इस पर चुप थी परंतु लगातार हो रहे ऐसे अप्रत्याशित एवं अनावंछित घटनाओं पर ध्यान देते हुए सरकार ने भी व्हाट्सएप्प नियंत्रण समिति को नोटिस जारी कर ऐसे घटनाओं की रोकथाम हेतु संदेश जारी किए हैं परंतु एक नागरिक होने के कारण हमारा भी यह कर्तव्य है कि ऐसी घटनाओं को घटित होने से पहले ही रोक कर देश के सुंदर भविष्य में अपना योगदान प्रदान करें।
अंकित कुमार,
प. चंपारण, बिहार
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