अद्धयात्म
अमावस्या तिथि में करने चाहिए ये काम, मिलेगा शुभ परिणाम


शुभ तिथि
चतुर्दशी रिक्ता संज्ञक तिथि प्रात: 7.54 तक तदुपरान्त अन्तरात्रि अगले दिन सूर्योदय पूर्व प्रात: 7.01 तक अमावस्या तिथि रहेगी, तदुपरान्त सूर्योदय पूर्व ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा प्रारम्भ हो जाएगी। इस प्रकार शनिवार को अमावस्या की क्षति होगी। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी व अमावस्या दोनों ही तिथियों में शुभ व मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित हैैं।
अमावस्या तिथि में स्नान, दान, पुण्य, पितृकार्यादि करने चाहिए। अमावस्या तिथि में जन्मा जातक सामान्यत: विद्या-बुद्धि में कुछ कम, अस्पष्ट वक्ता, अपने मन की बात किसी को नहीं बताने वाला, धीमी गति से कार्य करने वाला, व्याकुलचित्त पर सुन्दर, भाग्यशाली एवं सुखी होता है।
नक्षत्र: मूल तीक्ष्ण व अधोमुख संज्ञक नक्षत्र प्रात: 10.01 तक, तदन्तर पूर्वाषाढ़ा उग्र व अधोमुख संज्ञक नक्षत्र रहेगा।
मूल नक्षत्र में सामान्यत: वन, बगीचा, युद्ध, मिलाप, लड़ाई, बावड़ी, कुआं, तालाब व कृषि सम्बन्धी समस्त कार्य सिद्ध होते हैं। इसी प्रकार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में भी कुआं, बावड़ी, जेल से छोड़ना, कठिन काम आदि कार्य करने चाहिए।
मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों के सम्भावित अरिष्ट निवारण के लिए 27 दिन बाद जब पुन: मूल नक्षत्र की आकृति हो तब मूल शांति करवा देना जातकों के हित में होगा। मूल नक्षत्र में जन्मा जातक सामान्यत: विशाल हृदय, दानी, गंभीर, धनी, बिरादरी एवं मित्रों में सम्मान पाने वाला होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मा जातक बुद्धिमान, उपकारी, सबका मित्र, सब कार्यों में निपुण, सर्वप्रिय व स्वाभिमानी होता है। मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों का भाग्योदय 27 से 31 वर्ष की आयु के मध्य होता है।
योग
ध्रुव नामक नैसर्गिक शुभ योग दोपहर बाद 2.02 तक, इसके बाद व्याघात नामक नैसर्गिक अशुभ योग रहेगा। व्याघात नामक योग की प्रथम नौ घटी यथासंभव शुभ कार्यों में वर्जित रखने चाहिए।
करण
शकुनि नामकरण प्रात: 7.54 तक तदन्तर चतुष्पादिक स्थिर संज्ञक रहेंगे। स्थिर संज्ञक करणों में पितृकार्यादि कर सकते हैं।
चंद्रमा
सम्पूर्ण दिवारात्रि धनु राशि में रहेगा।
व्रतोत्सव
शनिवार को देवपितृ कार्य अमावस्या, शनैश्चरी अमावस्या, वकुला अमावस्या (उड़ीसा में) व कालबा देवी यात्रा (मुम्बई में) है।
शुभ मुहूर्त
उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार शनिवार को किसी शुभ व मांगलिक कार्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं हैं।
वारकृत्य कार्य
शनिवार को सामान्यत: तीक्ष्ण व दारूण संज्ञक कार्य, स्थिर संज्ञक कार्य, लोहा, पत्थर, मार्बल, धातु आदि के कार्य, अस्त्र-शस्त्र धारण, काष्ठकर्म, पशु क्रय-विक्रय कार्य सिद्ध होते हैं। पर कृषि संबंधी कार्य नहीं करने चाहिए।