अद्धयात्म

आज का पंचांग, आप का दिन मंगलमय हो, दिनांक -15 अक्टूबर, 2016, दिन – शनिवार

panchang-1452139593हिंदू धर्म में शनिवार को सूर्यपुत्र शनिदेव की पूजा की जाती है। शास्त्रों में शनिदेव को भाग्य संवारने वाला माना गया है। शनि की शांति के ऐसे कई उपाय हैं जिनके द्वारा मनुष्य के सारे कष्ट दूर होते हैं। शनिवार की रात में रक्त चन्दन से अनार की कलम से ‘ॐ ह्वीं’ को भोजपत्र पर लिख कर नित्य पूजा करने से अपार विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है। शनिवार को काले कुत्ते, काली गाय को रोटी और काली चिडि़या को दाने डालने से जीवन की रुकावटें दूर होती है। शनिवार को तेल से बने पदार्थ भिखारी को खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।

आज का पंचांग

विक्रम संवत् – 2073

वार – शनिवार

संवत्सर – सौम्य

शक – 1938

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास – आश्विन

पक्ष – शुक्ल

तिथि – चतुर्दशी

नक्षत्र – चित्रा

योग– ध्रुव

दिशाशूल- शनिवार को पूर्व दिशा और ईशानकोण का दिशाशूल होता है यदि यात्रा अत्यन्त आवश्यक हो तो तिल का सेवनकर प्रस्थान करें।

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:26 बजे तक।

सूर्योदय – प्रातः 05:56।

सूर्यास्त – सायं 05:34।

पर्व त्‍यौहार –

शरद पूर्णिमा- अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा शनिवार यानी 15 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है।

यूं तो हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है। इस बार शरद पूर्णिमा 15 अक्टूबर, शनिवार को है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं, जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है, इसके बाद उसे खाया जाता है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक रूप से खीर का प्रसाद भी वितरण किया जाता है।

शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा है महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं तथा जो सो रहा होता है वहां महालक्ष्मी नहीं ठहरतीं। शरद पूर्णिमा को रासलीला की रात भी कहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था।

कोजागर पूर्णिमा व्रत              

आश्विन मास की पूर्णिमा को कोजागर व्रत रखा जाता है। इस दिन विशेष रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। यह व्रत लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने वाला माना जाता है।

 

Related Articles

Back to top button