
सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय शुक्रवार से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा।
नई दिल्ली। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय शुक्रवार से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि शुक्रवार से दिल्ली के जाट समुदाय के लोग धरने पर बैठेंगे। दिल्ली के अलीपुर (नरेला) में एसडीएम के दफ्तर के सामने दिया जाने वाला यह धरना फिलहाल एक दिन का ही होगा।
यहां पर बता दें कि हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर बीस जिलों में एक-एक स्थान पर चल रहे धरने पांचवे दिन गुरुवार को भी जारी रहे। आंदोलन का नियंत्रण रोहतक के गांव जसिया में चल रहे धरनास्थल से किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को जाट समुदाय के लोगों ने बहादुरगढ़ में भी प्रशासन से धरना देने की इजाजत मांगी, लेकिन मिली नहीं। जाट समुदाय शुक्रवार से वहां भी धरना शुरू कर सकता है।
धरना स्थलों पर जहां जाट समुदाय के लोग डटे हुए हैं, वहीं भारी पुलिस फोर्स भी तैनात है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार आंदोलन की प्रत्येक गतिविधि पर निगाह बनाए हुए हैं। हर दो घंटे पर चंडीगढ़ में बने आपातकक्ष में हर जिले के जिला उपायुक्त आंदोलन की रिपोर्ट भेज रहे हैं।
कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री
वहीं, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात कहने का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान मारे गए युवकों के आश्रितों को 15 दिनों के अंदर नौकरी देने की घोषणा पिछले दिनों की है।
मुआवजा सभी को दिया जा चुका है। अगर किसी को नौकरी की जरूरत है तो वे आवेदन कर सकते हैं। शांति भंग करने का किसी को अधिकार नहीं दिया जाएगा। प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी कहा है कि कोर्ट का फैसला आते ही जाटों सहित छह जातियों के आरक्षण के लिए हरियाणा केंद्र को पत्र लिखेगा।