
आरक्षण पर हाईकोर्ट का आदेशः वोट बैंक बचाने की जुगत में सपा सरकार
इलाहाबाद (एजेंसी), आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले ने उत्तरप्रदेश की सपा सरकार को मुश्किल में डाल दिया है, जाति के सहारे वोट बैंक बढ़ाने के मंसूबो पर कोर्ट के फैसले ने पानी फेर दिया है। पुलिस भर्ती का लाभ लोकसभा चुनाव में लेने का सपा का दांव भी उलटा पड़ सकता है। पुलिस भर्ती के बीस हजार से अधिक पद आरक्षण के दायरे में हैं। 2007 से पहले सपा सरकार में हुई पुलिस भर्ती में सबसे अधिक लाभान्वित पिछड़ा वर्ग की अगड़ी जातियां ही हुई थीं।
अब सरकार मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में मॉडिफिकेशन कर उच्च न्यायालय को अवगत करा सकती है नहीं तो फिर विशेष अनुमति याचिका दायर करने का विकल्प तो खुला है ही।
हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने से सपा के वोट बैंक अहीर, यादव, ग्वाला, यदुवंशी आदि आरक्षण के दायरे से बाहर निकल जाएंगे, वहीं अनुसूचित जाति की चमार, धूसिया, जाटव आदि अन्य जातियां भी बाहर निकल सकती हैं।
सामाजिक न्याय समिति ने सौंपी रिपोर्ट
2001 में गठित सामाजिक न्याय समिति ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी यदि उसे ही आधार बनाएं तो आरक्षण की परिधि से पिछड़ा वर्ग की पटेल और कुर्मी जाति भी बाहर जा सकती है। समिति की रिपोर्ट में यह कहा जा चुका है कि यह जातियां पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल कर चुकी हैं। नये सिरे से इनके आंकड़े जुटाए गए तो कुछ और जातियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं। दूसरी ओर कई ऐसी जातियां हैं जिनके लिए समाज की मुख्य धारा में आने की राह आसान हो जाएंगी। पिछड़ा वर्ग में केवट, मल्लाह, निषाद, मोमिन, कुम्हार, कश्यप, भर, राजभर आदि जातियां ऐसी हैं जिन्हें उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिल पाया है। कमोबेश यही स्थिति अनसूचित जाति के आरक्षण में भी है।