
वर्ष 2007 से पहले के भर्ती पुलिस कर्मचारियों ने वेतन विसंगति एवं एरियर के भुगतान को लेकर पिछले वर्ष अगस्त में मिशन आक्रोश की नींव रखी थी। इसमें कई पुलिसकर्मी बर्खास्त और निलंबित तक हुए थे।
उसके बाद प्रदेश के डीजीपी बीएस सिद्धू ने मीडिया में बयान दिया था कि यदि वे 31 दिसंबर तक वेतन विसंगति दूर नहीं करा पाए तो इस्तीफा दे देंगे। अब 31 दिसंबर गुजरने के बाद मिशन आक्रोश की सुगबुगाहट फिर शुरू हो गई है।
इस पोस्ट के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आननफानन में ज्वालापुर कोतवाली के एसएसआई कमल मोहन भंडारी की ओर से अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्ट कहां से अपलोड की गई है, उस यूजर को चिह्नित किया जा रहा है।पोस्ट में यह भी लिखा है कि ‘किसी की कुर्बानी काम आएगी। हमने अपने साथियों को पृथक यानी अलग होते हुए देखा है। उनकी कुर्बानी बेवजह ही नहीं थी’। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मिशन आक्रोश की जद में आए कई पुलिसकर्मियों की सेवा समाप्त हुई थी। कई को निलंबन झेलना पड़ा था।
बोले डीजीपी
पे-स्केल की मांग पूरी कर कर दी गई थी और इस आशय का आदेश भी जारी हो चुका है। अब एरियर ही मिलना बाकी है, मुख्यमंत्री राज्य स्थापना दिवस के अवसर एरियर भुगतान की घोषणा कर चुके हैं, यह मामला शासन में विचाराधीन है। असल मांग तो पूरी हो ही चुकी है। अब यदि कोई अनुशासनहीनता करेगा तो कानून भी अपना काम करेगा।