
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हरिद्वार पहुंचे पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक और ओआरओपी का जिक्र कर जनता की नब्ज पर हाथ रखा तो छोटे व्यापारियों पर मरहम लगाने से भी नहीं चूके।
देहरादून: अपनी पहली जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे रंग में नजर आए। उत्तराखंड निर्माण के श्रेय से लेकर अब कैशोर्य की नाजुक वय में इसकी जिम्मेदारी हाथ में लेने का वादा कर उन्होंने यहां के जनमानस की भावनाओं को छुआ ही, साथ ही प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मुखिया हरीश रावत पर भी चुन-चुन कर हमले किए।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हरिद्वार पहुंचे पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक और ओआरओपी का जिक्र कर सैन्य बहुल सूबे की जनता की नब्ज पर हाथ रखा तो छोटे व्यापारियों पर मरहम लगाने से भी नहीं चूके। तेरह हजार करोड़ की चारधाम यात्रा मार्ग से सूबे में विकास का मार्ग प्रशस्त होने की बात कही तो जंगलों के दोहन और अवैध खनन को लेकर प्रदेश सरकार को भी चेता दिया। पहाड़ की जवानी और पानी के सदुपयोग की बात दोहराई, तो महिलाओं की चिंता से भी स्वयं को जोड़ा।
भाजपा ने लगभग पौने तीन साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में नमो लहर के बूते सूबे की पांचों सीटों पर जीत का परचम फहराया था और अब पार्टी को फिर भरोसा है कि इस विधानसभा चुनाव में भी मोदी मैजिक असर दिखाएगा। भाजपा ने इसी के मद्देनजर राज्य के चार अलग-अलग हिस्सों में प्रधानमंत्री की जनसभाओं का आयोजन किया है। दो मैदानी जिलों व दो पर्वतीय जिलों में जनसभाएं रखी गईं।
हरिद्वार में मोदी की पहली जनसभा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री का अधिकांश संबोधन उत्तराखंड पर ही केंद्रित रहा। उत्तराखंड को जोड़ते हुए उन्होंने केंद्र की उपलब्धियां बताई तो प्रदेश की रावत सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया।
इस चुनाव में उत्तराखंड में भाजपा ने ‘अटल जी ने बनाया, मोदी जी संवारेंगे’ स्लोगन को अपनी पंच लाइन बनाया है। मतलब साफ है, भाजपा उत्तराखंड के अलग राज्य के रूप में गठन के श्रेय के साथ ही अब मौजूदा केंद्र सरकार के जरिये इसके विकास की बात जनता तक पहुंचाना चाहती है।
प्रधानमंत्री ने इसे जनसभा में थोड़ा और विस्तार देते हुए उत्तराखंड की किशोरावस्था के नाजुक समय का हवाला देते हुए स्वयं इसकी जिम्मेदारी उठाने का वादा कर दिया। गौरतलब है कि उत्तराखंड गठन को 16 साल हुए हैं और अब विधानसभा चुनाव के बाद आने वाली सरकार इसकी युवावस्था, यानी 21 वें साल तक प्रदेश में रहेगी।
उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है। यहां हर दूसरे परिवार का कोई न कोई सेना में है। पूर्व सैनिकों और अद्र्धसैन्य बलों में सेवारत व सेवानिवृत्त मतदाताओं की संख्या इससे इतर है। लिहाजा, मोदी के संबोधन में वन रैंक, वन पेंशन और सर्जिकल स्ट्राइक को खासी तवज्जो मिली।
उत्तराखंड को वीरों और वीर माताओं की भूमि की संज्ञा देते हुए प्रधानमंत्री ने इन दोनों मुद्दों पर अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी तो दी ही, केंद्र की पिछली कांग्रेसनीत यूपीए सरकार पर भी वार करने का मौका नहीं गंवाया। उन्होंने उत्तराखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम लिए बगैर तंज कसा कि इन्होंने केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी उत्तराखंड के लिए कुछ नहीं किया।
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था पर भी मोदी ने तीखा प्रहार किया। मुख्यमंत्री के स्टिंग का इशारों-इशारों में उल्लेख करते हुए उन्होंने सूबे के अवाम से सवाल कर डाला कि जो करतूत लोगों ने टीवी पर देखी, क्या इस तरह की गंदगी को बदला नहीं जाना चाहिए। नोटबंदी पर कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश को सत्तर साल तक लूटा गया और वह लुटा धन वापस लाकर गरीबों को देंगे।
हालांकि हरिद्वार में व्यापारी तबके की बहुलता के कारण वह यह कहना नहीं भूले कि उनकी लड़ाई बड़े पदों पर बैठकर लूटने वालों से है, छोटे व्यापारियों से नहीं। उज्जवला योजना के तहत घर-घर तक रसोई गैस की उपलब्धता को महिलाओं की दशा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अब लकड़ी के धुएं से माताएं-बहनें बीमार नहीं होंगी। साल 2013 की आपदा को लेकर कांग्रेस के आरोप का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी उस वक्त गुजरात सरकार द्वारा दी गई राहत को लोग याद करते हैं।