अद्धयात्म
करें गायत्री मंत्र का जाप, आर्थिक तंगी से मिलेगी मुक्ति

धन, नौकरी समेत इन समस्याओं से मुक्ति दिलाएगा गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। अर्थात: हमें प्रार्थना करते हुए माता से हमारी बुद्धि को जगाने की अपील करनी चाहिए ताकि हम शुभ कार्यों की ओर प्रेरित हो सकें। गायत्री मंत्र में सभी वेदों का सार माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, गायत्री वेदमाता हैं और इसमें मनुष्य के सारे पापों को नष्ट करने की क्षमता होती है। गायत्री मंत्र से व्यापारी, नौकरीपेशा, घरेलू महिलाएं हो या विद्यार्थी के जप से सभी लोगों के कष्टों का निवारण करता है। आप भी जानिए गायत्री मंत्र के जप करने से क्या फायदे हैं…

दरिद्रता का नाश
व्यापार और नौकरी में लगातार हानि हो रही हो है। कार्य में सफलता न मिलना, आमदनी कम है तो ऐसे में गायत्री मंत्र का जाप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान करें। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो अधिक लाभ होता है।
नकारात्मक ऊर्जा को करें दूर
आपके बच्चे को बुरी नजर लगना या आपके घर को बुरी नजर लगाना या फिर आपके बने बनाए काम बिगड़ जाते हैं तो आप हर रोज 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी। न सिर्फ आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा आएगी बल्कि मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा।
संतान की समस्या होगी दूर
अगर आपके घर में बच्चे की किलकारी नहीं गुंज रही या संतान पक्ष की तरफ से चिंताग्रस्त हैं तो सूर्योदय के समय सफेद वस्त्र धारण कर ‘यौं’ बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। इससे आपकी संतान संबंधी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
विवाह कराए गायत्री मंत्र
यदि आपके विवाह में देरी हो रही हो तो सोमवार के दिन पीले वस्त्र धारण कर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करने से विवाह में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
रोगमुक्ति के लिए करें गायत्री मंत्र का जाप
अगर आपके घर में कोई लंबे समय से रोग से पीड़ित है तो किसी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें एवं उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के साथ ‘ऐं ह्रीं क्लीं’ का संपुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। जप के बाद जल से भरे पात्र का सेवन करें। इसस न सिर्फ गंभीर से गंभीर रोग का नाश होता है बल्कि यह जल किसी अन्य रोगी को देने से उसका भी रोग खत्म होता है।