अद्धयात्म
किसी भी काम में एक्सपर्ट होना चाहते हैं तो जरूरी है ये बात


अर्जुन की एकाग्रता ने बनाया उसे श्रेष्ठ धनुर्धर
महाभारत की एक कहानी बहुत प्रचलित है, जिसमें अर्जुन की एकाग्रता बताई गई है। ये कहानी कौरव और पांडव के बालपन की है। कहानी के अनुसार एक समय सभी कौरव और पांडव गुरु द्रोणाचार्य से धनुष-बाण चलाना सीख रहे थे। गुरु ने एक पेड़ पर तोते का खिलौना रखा और सभी राजकुमारों से कहा कि तोते की आंख पर निशाना लगाओ। सभी राजकुमारों में निशाना साध लिया। अब गुरुदेव ने एक-एक राजकुमार से पूछा- ‘तुम्हें क्या-क्या दिख रहा है?’ किसी राजकुमार ने कहा कि उसे पेड़ दिख रहा है, किसी ने कहा पेड़ पर बैठा तोता दिख रहा है। सभी ने अलग-अलग उत्तर दिए। अंत में द्रोणाचार्य ने अर्जुन से पूछा कि उसे क्या-क्या दिख रहा है तो अर्जुन ने जवाब दिया कि उसे सिर्फ तोते की आंख ही दिख रही है। अर्जुन का पूरा ध्यान सिर्फ तोते की आंख पर ही था। इस उत्तर से द्रोणाचार्य को समझ आ गया था कि अर्जुन ही श्रेष्ठ धनुर्धर बनेगा।
अर्जुन ने महाभारत युद्ध में ये साबित भी कर दिया कि वही श्रेष्ठ धनुर्धर है।
हमें भी सफलता पाने के लिए पूरी एकाग्रता लक्ष्य पर ही रखनी चाहिए।