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गूगल में 22 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ी, इन 7 सवालों का जवाब देकर बना IAS

गूगल में 22 लाख के पैकेज पर नौकरी थी, लेकिन आईएएस बनने का जुनून सवा था तो छोड़ दी। इंटरव्यू में 7 सवालों के जवाब दिए और सिलेक्ट हो गया। गूगल में 22 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ी, इन 7 सवालों का जवाब देकर बना IAS

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ये हैं हरियाणा के जींद निवासी हिमांशु जैन। हिमांशु ने सिविल सर्विस एग्जाम 2016 में 44वां रैंक हासिल किया है। हिमांशु के पिता पवन जैन दुकानदार हैं। जींद में स्कूलिंग के बाद हिमांशु ने आईआईटी, हैदराबाद से कंप्यूटर में एमटेक की। फिर हैदराबाद में ही गूगल में नौकरी जॉइन कर ली, लेकिन आईएएस अफसर बनने के लिए उन्होंने गूगल की नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गए। 

हिमांशु ने कहा कि आईएएस की परीक्षा के लिए उनकी चाची मीनाक्षी जैन उन्हें अपने हॉस्पिटल में बिठाकर घंटों पढ़ाती थीं। उनका कहना है कि चाची ने उनके अंदर आईएएस बनने के जज्बे को मजबूत किया, जिसका नतीजा है कि उन्होंने यह एग्जाम पास कर ली। उनके आईएएस बनने का केवल यही मकसद है कि समाज के युवाओं को कोई नई दिशा दे सकें। 

हिमांशु ने बताया कि उसका इंटरव्यू लगभग 35 मिनट चला था। इंटरव्यू पैनल में 6 लोग थे, जिन्होंने 40 से 50 सवाल पूछे थे। सबसे रोचक सवाल पर बात करते हुए हिमांशु ने बताया कि उससे एक सवाल पूछा गया था कि टेक्नोलॉजी ने आदमी की जिंदगी को आसान बना दिया है या पेचीदा। हिमांशु ने जवाब दिया कि यह इस्तेमाल पर निर्भर करता है कि फायदेमंद है और हानिकारक। 

सवालः नोकिया मार्केट में क्यों नही टिक पाया?
जवाबः कंपनी वक्त रहते अपने प्रोडक्ट में बदलाव नहीं कर सकी, इसलिए ऐसा हुआ।
सवालः आपको आईएएस सिलेक्ट करने पर विचार क्यों करें हम?
जवाबः मैं सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी ला सकता हूं, मुझे लोगों से बात करना पसंद है। 

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सवालः आपके व्यक्तित्व की क्या विशेषता है?
जवाबः मैं अपने काम को ईमानदारी से पूरा करने की कोशिश करता हूं।
सवालः सिविल सर्विस और लाइफ के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे?
जवाबः मैं पढाई और खेल के बीच बैलेंस बनाकर खेलता रहा हूं, आगे भी ऐसे ही करुंगा।

 सवालः आप एक एनजीओ से जुड़े हैं, कैसा अनुभव रहा?

जवाबः कॉलेज छोड़ते समय लड़के लड़कियां सामान हॉस्टल में ही छोड़ जाते थे, मैंने वो सामान एनजीओ की मदद से जरूरतमंदों तक पहुंचाया।
सवालः एनजीओ से जुड़ने का फायदा हुआ कुछ?
जवाबः एक खुशी मिली और लगा कि हां मैंने सोसाइटी के लिए कुछ किया है। 

 

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