
नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को हर नागरिक से स्वामी विवेकानंद से सहिष्णुता की प्रेरणा ग्रहण करने का आग्रह करते हुए कहा कि असली धर्म घृणा और मतभेद पर कतई आधारित नहीं हो सकता। स्वामी विवेकानंद की 15०वीं जयंती के समापन समारोह के मौके पर यहां विज्ञान भवन में कहा ‘‘हम सभी को विनम्रतापूर्वक स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को आत्मसात करना चाहिए। हमें एक दूसरे के प्रति सहिष्णुता सभी धर्मों के प्रति आदर की शिक्षा लेनी चाहिए और खुद को देश और अपने लोगों के प्रति समर्पित करना चाहिए।’’ ‘‘स्वामीजी के विचारों और शिक्षाओं का आदर करने और उनकी स्मृतियों का सम्मान करने और जिन मूल्यों की वकालत उन्होंने की थी उसे आत्मसात नहीं करते हैं तो उनका जन्मदिन मनाने की कोई जरूरत नहीं है।’’ उन्होंने कहा ‘‘उनका असली संदेश हमारे लिए यह है कि असली धर्म और असली धार्मिकता घृणा और मतभेद पर आधारित नहीं हो सकता बल्कि सभी के विश्वासों और आस्था के प्रति परस्पर आदर और सहिष्णुता पर आधारित होता है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि वे गहराई से महसूस करते हैं कि स्वामी विवेकानंद को ‘सच्ची श्रद्धांजलि’ आज के और कल के भारत के परिप्रेक्ष्य में 21वीं सदी के लिए उनकी शिक्षा और उनके विचारों की प्रासंगिकता को मान्यता दे कर दी जा सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने भी दार्शनिक और धार्मिक विद्वान स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वास्तव में तभी स्वतंत्र होगा जब हर भारतीय गरीबी अज्ञान और रोग से मुक्त होगा। भारत हमारी महान मातृभूमि है और हमें दुनिया को बहुत सिखाने के साथ ही उससे बहुत कुछ सीखना है।