चिदंबरम बोले- एयरफोर्स ने 126 एयरक्राफ्ट मांगे थे, लेकिन मोदी सरकार ने सिर्फ 36 कर ही दिए

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि एयरफोर्स ने अपनी जरुरतों के मद्देनजर 126 एयरक्राफ्ट मांगे थे, लेकिन सरकार ने उनकी इस मांग को घटाकर 36 कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री और कानून मंत्री ने कभी इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि सरकार ने सात स्क्वाड्रन की जगह केवल दो स्क्रवाड्रन एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना को मंजूरी क्यों दी है।
चिदंबरम का कहना था कि राफेल की कीमतों को लेकर जब भी मोदी सरकार से सवाल पूछा जाता है तो उनका जवाब यह होता है कि भारत और फ्रांस के बीच जो करार हुआ है उसकी गोपनीयता की शर्तों के कारण कीमत नहीं बता सकते। दूसरी ओर, राफेल डील में यह भी लिखा है कि गोपनीयता की शर्तें रक्षा से संबंधित बातों तक ही सीमित हैं। इसका साफ मतलब है कि राफेल की कीमत सार्वजनिक की जा सकती है।
यूपीए सरकार ने 2007 में दसॉल्ट एविएशन के साथ बातचीत कर राफेल विमान की राशि 79.3 मिलियन यूरो (642 करोड़ रुपये) तय की थी। साल 2011 में यह कीमत 100.85 मिलियन यूरो (817 करोड़ रुपये) हो गई। एनडीए सरकार ने 2016 में दावा किया कि उसने राफेल की 2011 वाली कीमतों के अनुसार नौ फीसदी की छूट ले ली है। खास बात है कि यह छूट 126 विमानों के लिए नहीं, बल्कि 36 विमानों के लिए मिली थी। अब एक विमान की कीमत 91.75 मिलियन यूरो (743 करोड़ रुपये) तय कर दी गई।
पी. चिदंबरम ने कहा, भारतीय वायु सेना ने यह मांग रखी थी कि राफेल विमान कम से कम 13 विशेषताओं से लैस होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो ही एयरफोर्स की जरुरत पूरी हो सकती है। इन बातों पर विचार करने के बाद तय हुआ कि 36 राफेल विमानों के लिए 1.3 बिलियन यूरो (10536 करोड़ रुपये) अदा किए जाएंगे।
इस हिसाब से प्रति विमान की कीमत 36.11 मिलियन यूरो (292 करोड़ रुपये) बनती है। 2007 में इसकी कीमत 11.11 मिलियन यूरो (90 करोड़ रुपये) थी। यहां बता दें कि वायु सेना ने जिन 13 विशेषताओं की मांग रखी थी, वे यूपीए और एनडीए सरकार के समय में वैसी ही थी। उनमें कोई बदलाव नहीं आया था।