चोरी के शक में बच्ची को मारा थप्पड़, कमरे में बंदकर जिंदा जलाया

रायपुर। खमतराई थाना क्षेत्र स्थित न्यू गोंदवारा बस्ती में दरिंदगी का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। सोमवार की शाम चोरी के शक में पड़ोसी महिला ने 12 साल की बच्ची को पकड़कर पहले थप्पड़ मारा, इससे जी नहीं भरा तो कमरे में बंद कर उसके शरीर पर मिट्टी तेल उड़ेला और जिंदा चला दिया।
गंभीर रूप से झुलसी बच्ची की मंगलवार तड़के मौत हो गई। मासूम ने मृत्यु पूर्व तहसीलदार को दिए बयान में आशा जायसवाल द्वारा आग लगाने की बात कही। इसके आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से बच्ची के परिजन व बस्ती के लोग आक्रोशित हैं।
मंगलवार तड़के आग में 85 फीसदी झुलसी आरती साहू (12) पिता कृष्णा की मौत अंबेडकर अस्पताल में होने के बाद नईदुनिया टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया और परिजनों के साथ आसपास के लोगों से बात कर घटना की असलियत जानने की कोशिश की। रिंग रोड दो बेस्ट प्राइज से लगी न्यू गोंदवारा बस्ती में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग छोटे-छोटे खपरैल व झोपड़ीनुमा घर में रहते हैं।
यहां दो कमरे के घर में पत्नी व बच्चों सहित रहने वाला कृष्णा साहू (41) फैक्टरी मजदूर है। उसके पांच बच्चों सरिता, आरती, कविता, संजय व अजय में आरती तीसरे नंबर की थी। आरती की मौत से मंगलवार को पूरे गोंदवारा क्षेत्र में मातम छाया रहा। दोपहर बाद पास के श्मशान घाट में बस्ती के सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में परिजनों ने आरती का अंतिम संस्कार किया।
कंचा लेने गई तो समझ लिया चोर और कमरे में कर दिया बंद
परिजनों के मुताबिक सोमवार दोपहर ढाई बजे छठवीं में अध्ययनरत आरती स्कूल से घर लौटने के बाद छोटे भाई अजय, बहन कविता और पड़ोस के कुछ बच्चों के साथ कंचे खेल रही थी। इस दौरान कंचा पड़ोस के आशा बाई जायसवाल (33) पति रामगोपाल के घर चला गया। आरती कंचा लाने भीतर घुसी तो आए दिन घर में रखे लोहे का सामान चोरी जाने पर आशा ने आरती को चोर समझ लिया और उसे थप्पड़ मारकर कमरे में बंद कर दिया। साथ खेल रहे बच्चों की हिम्मत नहीं हुई कि वे आरती को छुड़ा लें। वे बाहर से ही झांकते रहे।
चीख सुनकर सहम गए भाई-बहन
मासूम कविता, अजय ने बताया कि आरती को कमरे में बंद कर उसकी पिटाई की गई। वे डरे-सहमे बाहर से ही देख रहे थे। इस बीच आरती को छुड़ाने घर में जाने की कोशिश की तो शंकर उर्फ राजन (आशा के बेटे) ने डांटकर भगा दिया। चूंकि आरती की मां गीता और बड़ी बहन गोगांव गए थे, पिता धरसींवा में थे और आसपास के महिलाएं-पुरुष भी काम पर गए थे, लिहाजा बच्चे शांत बैठ गए। करीब आधे घंटे बाद कमरे से आरती की चीख सुनाई दी तो बच्चे सहम गए। फिर आशा ने ही बाहर निकलकर शोर मचाते हुए कहा कि आरती जल गई है। बच्चों ने कहा कि आशा ने ही आरती को जलाया।
दुश्मनी नहीं है, फिर क्यों जलाया?
आग से झुलसी आरती की मौत की खबर परिजनों को हुई तो उनके सुधबुध का ठिकाना न रहा। बस्ती में हरेक आंख भर आई। आरती की मां गीता ने बिलखते हुए कहा- हमारे परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है, फिर क्यों जलाया। अगर बच्ची ने कोई गलती की थी तो बताना चाहिए था। जलाने के बाद आशा ने ही फोन कर यह कहा कि आरती ने बंद कमरे में आग लगा ली। यह सुनकर गोगांव से भागते हुए घर आए तो पता चला कि आशा ने चोरी के संदेह में बच्ची को मार डाला।
मैंने नहीं जलाया, डरकर खुद लगा ली आग-आशा बाई
आरोपी महिला आशा बाई ने आरती को जलाकर मारने से साफ इंकार किया है। वह पुलिस के सामने बार-बार अपने आप को निर्दोष साबित करने की कोशिश करती रही। आशा ने नईदुनिया से कहा कि उसके घर से लगातार कबाड़ में रखा लोहा चोरी हो रहा था। चोर को पकड़ने के लिए ही वह सोमवार को काम पर नहीं गई थी। आरती को लोहा ले जाते रंगेहाथ पकड़कर उसे कमरे में बंद किया और उसके माता-पिता को बताने गई, लेकिन घर पर कोई नहीं था।
जब वह लौटी तो आरती के चीखने की आवाज सुन व कमरे से आग की लपटें उठते देख उसने बाहर से बंद सांकल खोला तो आरती आग में जल रही थी। उस पर पानी डालकर उसने आग बुझाई और आसपास के लोगों को जानकारी दी। फिर फोन पर खुद आरती की मां व पिता को उसने जानकारी दी। आशा ने कहा कि आरती ने कहा था कि चोरी की बात घरवालों को पता न चले, इससे डरकर उसने आग लगा ली। जिस कमरे में उसे बंद कर रखा था, वहां एक बोतल में आधा लीटर मिट्टीतेल था और पास ही माचिस भी रखा था। आशा के पति रामगोपाल जायसवाल पेशे से वाहन चालक है। उसका भी कहना है कि पत्नी निर्दोष है।
बच्ची ने दिया बयान, कहा-महिला ने ही जलाया
मासूम आरती ने तहसीलदार को मृत्यु पूर्व दिए बयान में कहा है कि आशा ने उसे पकड़ा और चोरी करती है कहकर दो थप्पड़ मारा। जब वह घर से निकलने लगी तो उसे कमरे में बंद कर मिट्टीतेल शरीर पर उड़ेल कर आग लगा दी।