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जानिए इ‍ंंडियन आर्मी के ऑफिसर,जेसीओ और जवान की रैंक्‍स

01-1464760630-field-marshal-of-the-indian-armyबेंगलुरु। इंडियन आर्मी, एयरफोर्स और नेवी इसमें शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना हर युवा देखता है लेकिन सिर्फ कुछ ही लोग होते हैं जिनका सपना पूरा हो पाता है। इंडियन आर्मी की सैनिक क्षमता की बात अगर करें तो वर्तमान समय में एक्टिव पर्सनल की संख्‍या 1,325,000 और रिजर्व पसर्नल की संख्‍या 2,143,000 है।

इंडियन आमी के कमीशंड ऑफिसर्स आर्मी के लीडर के तौर पर होते हैं और उनके पास किसी पलटन और कंपनी को कमांड करने की जिम्‍मेदारी होती है। अलग-अलग कोर्सेज के बाद ऑफिसर्स को मेरिट के आधार पर प्रमोशन और नियुक्तियां मिलती हैं।

फील्‍ड मार्शल इंडियन आर्मी में अभी तक दो ही ऑफिसर्स को फील्‍ड मार्शल की रैंक मिली है। फील्‍ड मार्शल सैम मॉनकेशॉ और फील्‍ड मार्शल केएम करियप्‍पा। फील्‍ड मार्शल एक फाइव स्‍टार रैंक होती है।

जनरल यह रैंक चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ यानी आर्मी चीफ का मिलती है। सेना प्रमुख का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और उनका पद कैबिनेट सेक्रेटरी के बराबर ही होता है।

लेफ्टिनेंट जनरल जनरल से पहले की रैंक होती है लेफ्टिनेंट जनरल और आर्मी चीफ बनने के लिए काफी अहम भी मानी जाती है। इस रैंक के लिए ऑफिसर के पास 36 वर्ष की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता होना जरूरी है।

मेजर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल बनने से पहले वाली रैंक जिसके लिए ऑफिसर के पास 32 वर्षों की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता होनी जरूरी है।

ब्रिगेडियर मेजर जनरल से पहले की रैंक ब्रिगेडियर और इसके लिए ऑफिसर के पास 25 वर्षों की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता होना जरूरी।

कर्नल ब्रिगेडियर से पहले वाली रैंक जिसमें सेलेक्‍शन के लिए 15 वर्षों की कमीशंड सर्विस की योग्‍यता जरूरी। इस रैंक के प्रमोशन के लिए ऑफिसर का 26 वर्षों का इंतजार करना पड़ता है।

लेफ्टिनेंट कर्नल आप इसे किसी ऑफिसर के लिए उसके सीनियर होने की पहली सीढ़ी मान सकते हैं। 13 वर्षों की कमीशंड सर्विस पूरी करने के बाद ऑफिसर इस रैंक पर प्रमोट होते हैं।

मेजर इंडियन आर्मी में किसी भी ऑफिसर के लिए एक अहम रैंक मेजर जो कि छह वर्षों की सर्विस के बाद किसी ऑफिसर को मिलती है।

कैप्‍टन सेना में कमीशंड होने के बाद किसी ऑफिसर के लिए आगे बढ़ने का दूसरा पड़ाव होती है और कमीशंड होने के दो वर्षों के अंदर ऑफिसर को कैप्‍टन की रैंक मिलती है।

कैप्‍टन सेना में कमीशंड होने के बाद किसी ऑफिसर के लिए आगे बढ़ने का दूसरा पड़ाव होती है और कमीशंड होने के दो वर्षों के अंदर ऑफिसर को कैप्‍टन की रैंक मिलती है।

लेफ्टिनेंट लेफ्टिनेंट कमीशन के दौरान मिलने वाली सबसे पहली रैं‍क होती है। एक ऑफिसर के तौर पर सैनिक जीवन की शुरुआत इसी रैंक से होती है।

सूबेदार मेजर जेसीओ रैंक सूबेदार मेजर जूनियर कमीशंड ऑफिसर की आखिरी सीढ़ी होती है और करीब 34 वर्षों की सर्विस के बाद वह रिटायर हो जाते हैं।

सूबेदार 30 वर्षों की सर्विस के बाद जेसीओ पद पर सूबेदार की रैंक संभालने वाला सैनिक रिटायर हो जाता है।

नायब सूबेदार यह जेसीओ की पहली सीढ़ी होती है और वह अपनी सर्विस के 28 वर्ष पूरे होने पर रिटायर हो जाते हैं।

नॉन कमीशंड ऑफिसर इस श्रेणी में हवलदार, नायक और लांस नायक आते हैं। इनके रिटायरमेंट की अधिकतम उम्रसीमा 26 वर्ष और न्‍यूनतम 22 वर्ष है।

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