
एजेंसी: छोटा था तो उसकी पढ़ाई को लेकर चिंतित थी। काफी कष्ट सहकर अपने बेटे को पढ़ाया। बेटे को इतना काबिल बनाया कि वह आज अपना बिजनेस चला रहा है। बिजनेस में आज वह पहचान का मोहताज नहीं है। यह बताते हुए महिपालपुर दिल्ली निवासी 72 वर्षीय निर्मला की आंखें भावुक हो गईं। वह पिछले करीब दो वर्ष से सेक्टर-4 स्थित वृद्धाश्रम में रहती हैं।
निर्मला ने बताया कि उसे सफल करने के लिए उन्होंने अपनी छोटी-छोटी जरूरतों का गला घोट दिया। बेटे की हर ख्वाहिश को पूरा किया। उन्हें नहीं पता था कि उनके लाड-प्यार का सिला उनका बेटा उन्हें इस तरह से देगा। उन्होंने बताया कि एक दिन शराब के नशे में उनके साथ मारपीट की और घर से निकाल दिया। दो साल हो गए हैं, उन्हें सेक्टर-4 स्थित वृद्धाश्रम में रहते हुए।
आज भी उनका दिल बेटे को देखने के लिए व्याकुल रहता है। बेटे ने घर से निकालने के बाद आज तक उनका पता तक लेने की कोशिश नहीं की। जब पुलिस लावारिस समझकर उन्हें वृद्धाश्रम में लाई थी तो उन्होंने अपने बेटे के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस ने संपर्क किया तो बेटे ने उन्हें पहचानने से ही इंकार कर दिया।