राष्ट्रीय

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट में जेनेरिक दवा की परिभाषा नहीं

नई दिल्ली : भारत में जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट प्रचलित है। उसमें जेनेरिक दवा की परिभाषा सरकार ने अभी तक तय नहीं की है। पिछले 30 सालों से जेनरिक दवाओं को लेकर केंद्र सरकार तरह-तरह के आश्वासन और कार्यवाही करने की बात करती है किंतु अभी तक ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में जेनेरिक दवा की परिभाषा और संबंधित नियम के नहीं बनाए जाने से यह सारी कवायद हवा हवाई है। पिछले तीन दशक से भारत में जेनेरिक दवा का मतलब सिंगल साल्ट वाली दवा को माना जाता है। जिस दवा का कोई ब्रांड नाम ना हो, उसे यहां पर जेनरिक कह देते हैं। मंथली इंडेक्स ऑफ़ मेडिकल स्पेशलिटी के प्रमुख डॉक्टर सीएम गुलाटी के अनुसार इन दवाओं को वर्तमान एक्ट के तहत भारत में बेचा ही नहीं जा सकता है। जेनरिक दवाओं की बिक्री के लिए केंद्र सरकार को पहले एक्ट में संशोधन करना चाहिए। उसके बाद ही यह संभव हो पाएगा।

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रेसिडेंट जय श्री मेहता का कहना है कि डॉक्टरों को जितना संभव हो जेनरिक दवा पर्ची में लिखना चाहिए। किंतु उनका भी मानना है यदि डॉक्टर ऐसा नहीं करते हैं तो नियमानुसार उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देशभर में जन औषधि केंद्र खोलने और जेनेरिक दवा लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वही विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सरकार एक्ट में जेनरिक की परिभाषा तय नहीं करती है। उससे संबंधित नियम नहीं बनाती है तब तक देश में जेनरिक दवाओं को लेकर इसी तरह की हवा हवाई बातें होती रहेंगी। मरीज ब्रांडेड दवाओं से लुटते रहेंगे।

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