राष्ट्रीय
देखिए, 12 करोड़ का कुत्ता, क्वीन विक्टोरिया ने इसे पाला था


ये है तिबतन मैस्टीस नस्ल का डॉग। दिल्ली से डॉग शो में आए इस डॉग के मालिक अलोक नंदा ने बताया कि वे इस कु्त्ते को नैनीताल से लेकर आए थे। वर्ष 2014 में चीन में इस नस्ल का कुत्ता 10 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत में बिका था, जबकि लंदन में वर्ष 2011 में यह 6.8 करोड़ रुपए में बिका था।
अलोक नंदा ने बताया कि इसका नाम डिलॉन्ग है। तिब्बत में लोग इन्हें गांव की रखवाली करने के लिए रखते हैं। लोगों को यह तेंदुओं और भेड़ियों से बचाते हैं। यह तीन भेड़ियों को एक साथ मार सकते हैं। हालांकि तिब्बती स्निफर के पप्पी की कीमत तीन लाख रुपये है। उनके पास इस नस्ल के चार डॉग्स हैं।
बताया जाता है कि भारत के वायस रॉय ने 1847 में इसे इंग्लैंड की क्वीन विक्टोरिया को दिया था। उसके बाद क्वीन ने इसे पाला था। 1874 में प्रिंस ऑफ वेल्स ने इसे इंपोर्ट करवाया। 1875 के अलेग्जेंडर पैलेस शो में इसे दिखाया। चीन में लोग इस तिब्बती मेस्टिफ को लकी मानते हैं। खासकर लाल रंग के मेस्टिफ को।
डॉग शो में 291 डॉग्ज की एंट्री आई और 45 डॉग ब्रीड्स। बब्बर की दहाड़ और लैला के प्यार ने सबको मुरीद बना लिया। दोनों हरियाणा के चौटाला गांव से मालिक अश्वनी चौटाला के साथ डॉग शो में हिस्सा लेने पहुंचे थे। बब्बर 100 किलो का है तो लैला का वजन 98 किलो है। इन्हें चिकन बेहद पसंद है।
अश्वनी चौटाला कहते हैं कि जब ये दोनों अपने घर की रखवाली करते हैं तो पूरा गांव आराम से सोता है। इनकी खासियत है कि ये एनेटोलियन शेफर्ड (अलाबाई) नस्ल के डॉग्स हैं। यह तुर्की के बर्फीले इलाके में पाए जाते हैं। वहां ये साल में 3 बार पूजे जाते हैं। उसके बाद इन्हें आपस में लड़वाया जाता है।
चंडीगढ़ सेक्टर 22 निवासी पुनीत कपूर बावा के ग्रेनेड नस्ल के डॉग गब्बर से मिलिए। गब्बर तीन बार घर में घुसने वाले चोरों को पकड़ चुका है। पुनीत ने बताया कि यह ब्रीड उन्होंने आस्ट्रेलिया से मंगवाई है। यह खाने में मलाई,� दूध, पनीर पसंद करता है। रोजाना पुनीत इसे 10 किमी सैर कराते हैं।
बंगलूरू से आए पवन ने बताया कि अफगान हाउंड की भारत में भी ब्रीडिंग शुरू हो गई है। इसके बाल काफी लंबे होते हैं। इनकी ग्रूमिंगकरने में तीन से चार घंटे का समय लग जाता है। इनकी डाइट नार्मल है। विजेताओं का चयन आस्ट्रेलिया से आए जज फ्रांसेस डार्लिंग और फिलिपींस के सिमोन सिम ने किया।
शो के दौरान कैनल क्लब ने डॉग्स की खरीद-फरोख्त पर रोक के बाद भी यहां खरीद-फरोख्त जारी रही। जब पुलिस ने कुछ लोगों को रंगे हाथ पकड़ा तो डॉग मालिकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। उसके बाद पुलिस ने हिदायत दी कि अगर डॉग बेचना है तो कैंपस के बाहर जाकर बेचो। क्लब ने लोगों को ठगी से बचाने के लिए कुत्ते बेचने पर बैन लगाया था। इसका कारण यह है कि कई बार शो के बाद लोगों ने क्लब को शिकायत दी थी उन्हें बीमार डॉग बेचा गया।