बैंकों की एसेट क्वालिटी स्थिर, लेकिन कमजोर रहेगी: मूडीज

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने सोमवार को कहा कि भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी स्थिर तो होगी लेकिन कमजोर होगी, क्योंकि फंसे कर्ज की समस्या का निपटान पूरा होने करीब है और कॉरपोरेट सेक्टर की हालत में भी सुधार हुआ है। बैंकों ने भारी मात्रा में फंसे कर्ज की पहचान की है और वे इसे वसूलना शुरू करेंगे, जिससे उनकी एसेट क्वालिटी बढे़गी।
- फंसे कर्ज की समस्या का निपटान पूरा होने से भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी स्थिर होगी
- भारी मात्रा में फंसे कर्ज की पहचान की गई है, जिसे बैंक वसूलना शुरू करेंगे, जिससे एसेट क्वालिटी बढे़गी
- सरकारी बैंकों में पूंजीकरण कमजोर रहेगा, लेकिन सरकार के समर्थन से उन्हें राहत जरूर मिलेगी
- बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार आएगा, लेकिन कर्ज की लागत अधिक होने से यह कमजोर रहेगा
नई दिल्ली: क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज का कहना है कि फंसे कर्ज की समस्या का निपटान पूरा होने और कॉरपोरेट सेक्टर की हालत में सुधार होने से भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी स्थिर तो होगी लेकिन कमजोर रहेगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘बैंकों ने भारी मात्रा में फंसे कर्ज की पहचान की है और वे इसकी वसूली शुरू करेंगे, जिससे उनकी एसेट क्वालिटी बढे़गी।
हालांकि, एसेट क्वालिटी में सुधार का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि फंसे कर्ज के बड़े खातों का निपटान कितना सफल हो पाता है।’ मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने ऐनुअल बैंकिंग सिस्टम आउटलुक में यह भी कहा कि सरकारी बैंकों में पूंजीकरण कमजोर रहेगा, लेकिन सरकार के समर्थन से उन्हें राहत जरूर मिलेगी।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कम पूंजी की समस्या बरकरार रहेगी और न्यूनतम पूंजी की जरूरत पूरी करने के लिए उन्हें सरकार के पूंजीकरण पर निर्भर रहना होगा। एजेंसी ने यह भी कहा कि बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार आएगा, लेकिन कर्ज की लागत अधिक होने से यह कमजोर रहेगा। फंसा कर्ज (एनपीए) घटने से नेट इंट्रेस्ट मार्जिन (एनआईएम) मामूली रूप से बढ़ेगा, हालांकि सरकारी बैंकों की कर्ज लागत ऊंची रहेगी।