ज्ञान भंडार
बैन के बाद भी गुजरात के इस गांव में बिक रही शराब


इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गांव के पहले प्रवासी सरपंच धनीराम दुबे कहते हैं कि 12 घंटे नौकरी करने के बाद मजदूर थक जाते हैं और इसके बाद वह सिगरेट, तंबाकू, शराब और गांजा के आदी हो जाते हैं। यहां और बगल के गांवों में देश में बनने वाली शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। जहरीली शराब से मरने वालों में ज्यादातर प्रवासी ही हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने पिछले महीने में होने वाली मौतों और कच्ची शराब को बेचने वाले रैकेट की जांच की जिम्मेदारी आतंकवाद निरोधक दस्ते को सौंपी है। इस मामले में पुलिस ने 14 लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें ज्यादातर लोकल हैं।
रामू यादव सहित गिरफ्तार अंतिम तीनों व्यक्ति पर 65 (A) के तहत बॉम्बे प्रॉबिशन (गुजरात सरकार) के अंतर्गत मौत की सजा मुकर्रर की है। बताते चलें कि साल 2009 में जहरीली शराब पीने की वजह से 136 लोग मारे गए थे। इसके बाद राज्य सरकार गुजरात विधानसभा में एक संशोधन विधेयक लेकर आई थी जिसमें जहरीली शराब बनाने और बेचने वालों के लिए मौत की सजा का प्रावधान था।